May 19, 2021

तुलसी खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of basil in hindi

तुलसी खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of basil in hindi
तुलसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी के रूप में कई रोगों की दवा है.

हम सभी तुलसी के पौधे से अवगत हैं क्योंकि हिंदू और आयुर्वेदिक ग्रंथों में तुलसी को देवी का दर्जा दिया गया है इसलिए भारत के हर घर में वर्षों से तुलसी की पूजा की जा रही है. हिंदू धर्म के कई त्योहारों पर पूरी पूजा पाठ और विधि के साथ तुलसी की पूजा की जाती है.

तुलसी के पौधे की पूजा करने से घर में सुख शांति, पवित्र ऊर्जा बनी रहती हैं तथा हम कई तरह के रोगों से सुरक्षित रहते हैं. लेकिन शायद हम तुलसी से होने वाले औषधीय लाभ के बारे में कम जानते हैं.

100 ग्राम तुलसी की ORAC वैल्यू  61063 होती है. ORAC (oxygen radical absorbance capacity) का मतलब ऑक्सीजन रेडिकल अवशोषण क्षमता है. यह किसी भी खाद्य पदार्थ की कुल एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को मापने का पैमाना है. तुलसी की ORAC वैल्यू अधिक होने से इसके अंदर एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा पाई जाती है.

अतः इस लेख में तुलसी खाने के फायदे और नुकसान, तुलसी की तासीर, तुलसी का उपयोग और तुलसी के आयुर्वेदिक गुणों के बारे में विस्तृत रूप से जानेंगे.


    तुलसी क्या है | What is basil in hindi

    प्राचीन समय से ही तुलसी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी के रूप में कई तरह के रोगों को दूर करने लिए उपयोग की जा रही है.

    आज भी बाजार में उपलब्ध कई तरह के आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स, एलोपैथी और होम्योपैथी दवाइयों में तुलसी का उपयोग किया जा रहा है. इससे हम समझ सकते हैं कि तुलसी कितनी शक्तिशाली जड़ी-बूटी के रूप में ईश्वरीय देन है.

      ▪ तुलसी एक आयुर्वेदिक पौधा है जिसके पत्ते ही नहीं बल्कि इसकी जड़, शाखाएं और बीज कई बीमारियों के इलाज के लिए कारगर है.

      ▪ तुलसी की कई प्रजातियां हैं मिलती है जैसे कि राम तुलसी, वन तुलसी, कपूर तुलसी, काली तुलसी और मरुआ तुलसी जिनमें श्री तुलसी (हरी पत्तियां) व कृष्ण तुलसी (बैंगनी पत्तियां) प्रमुख हैं.

      ▪ तुलसी का पौधा 1 से 3 फुट ऊंचा, बैगनी पत्तियां और फूल छोटे-छोटे सफेद रंग के होते हैं.

      ▪ यह पौधा सामान 2 से 3 वर्षों तक हरा- भरा रहता है तथा यह बारहमासी पौधा होता है.

      ▪ तुलसी का वानस्पतिक नाम ऑसीमम सैक्टम (Ocimum Sactum) है.

      ▪ तुलसी के कुल का नाम लैमिएसी (Lamiasi) है.

    तुलसी के आयुर्वेदिक गुण | Ayurvedic properties of Tulsi in hindi

    तुलसी से बनी औषधियां कई गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण होती हैं. तुलसी जैसे आयुर्वेदिक पौधे में छोटी से लेकर बड़ी-बड़ी बीमारियों का औषधीय इलाज समाया है. इसलिए तुलसी के पौधे को संजीवनी जड़ी बूटी का दर्जा दिया गया है.

    तुलसी के अंदर कई तरह के औषधीय गुण (तुलसी के गुण) या पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे कि

    एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक, मिथाइल, ट्रैनिन, सैवोनिन, ग्लाइकोसाइड, ऊर्जा, प्रोटीन, नियासिन, विटामिन A, विटामिन C, विटामिन E, विटामिन K, थायमीन, राइबोफ्लेविन, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम इत्यादि.

    अन्य भाषाओं में तुलसी के नाम – Basil name in other languages

    भाषा (Language) नाम (Name)
    हिंदी (Hindi) तुलसी (Tulsi), वृंदा (Vrnda)
    गुजराती (Gujarati) तुलसी (Tulsi)
    अंग्रेजी (English) बेसिल (Basil)
    तमिल (Tamil) तुलशी (Tulashi)
    संस्कृत ( Sanskrit) तुलसी (Tulsi), सुरसा (Surasa), सुलभा (Sulbha), गौरी (Gauri), देव दुन्दुभि (dev dundubhi)
    बंगाली (Bengali) तुलसी (Tulsi)
    नेपाली (Nepali) तुलसी (Tulsi)
    मराठी (Marathi) तुलस (tulas)

    तुलसी के फायदे और उपयोग | Benefits and Uses of Tulsi in hindi

    तुलसी का पौधा अपने आप में ही जड़ी-बूटी होता है क्योंकि इसके पत्ते, जड़, बीज हर एक के अपने-अपने महत्व होते हैं. तुलसी के पत्ते खाने के फायदे या तुलसी की चाय का अपना ही महत्व होता है तो आइए जानते हैं तुलसी के लाभ.

    1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में तुलसी के फायदे (increasing immunity)

    एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को बाहरी संक्रमण या कई प्रकार के रोगों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है.

    मौसम के परिवर्तन से या थोड़ी सी कमजोरी आने पर तुरंत कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं  यह इसलिए होता है क्योंकि इम्यूनिटी पावर कमजोर होती है.

    नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार तुलसी के पत्तों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण मौजूद होता है. इसलिए तुलसी को इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक भी कहते हैं.

    तुलसी के बीजों के अंदर फेनोलिक और फ्लैवोनोइड्स गुण मौजूद होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं तथा तुलसी के अंदर प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में शरीर से विषैले टॉक्सिन को बाहर निकालता है. 

     हर 100 ग्राम तुलसी के अंदर 18 mg विटामिन सी पाया जाता है.

    उपयोग - रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity boost) को मजबूत करने के लिए तुलसी का अर्क, तुलसी की चाय या तुलसी के काढ़े का उपयोग करना लाभप्रद है.

    2. तुलसी आंखों के लिए (Basil for eyes)

    आंखों की कई प्रकार की बीमारियों के लिए तुलसी का उपयोग एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में किया जाता है जैसे की आंखों में पीलापन, लाली को कम करना, रतौंधी और आँखो की रोशनी बढ़ाने मे आदि.

    ऐसा इसलिए है क्योंकि तुलसी के अंदर विटामिन A प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो स्वस्थ आंखों के लिए जरूरी विटामिन होता है.

    100 ग्राम तुलसी के अंदर 5275 IU विटामिन ए पाया जाता है.

    उपयोग - तुलसी के पत्तों का रस निकालकर निकालें और इसकी दो बूंद प्रत्येक आंखों में डालें इस प्रक्रिया को कुछ दिनों तक करने में करने से आंखों के कई रोगों में आराम मिलता है लेकिन ऐसा करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

    3. तनाव को करें कम (Reduce stress)

    आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में हर कोई मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहा है इस तनाव को कम करने के लिए हम कई तरह की दवाइयां और थेरेपी को अपनाते हैं.

    ऐसे में तनाव को कम करने के लिए तुलसी एक उपयोगी जड़ी-बूटी के रूप में कार्य करती है क्योंकि तुलसी के पत्तियों के अंदर एंटी-स्ट्रेस गुण पाए जाते हैं और कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर नियंत्रित करती है.

    उपयोग - तुलसी के 8-10 पत्तों का रोज दो बार सेवन करने से तनाव कम करने में मदद मिलती है.

    4. सिर दर्द में तुलसी के फायदे (headache)

    जिंदगी में जिम्मेदारियों या घर के काम का स्ट्रेस लेवल इतना बढ़ जाता है की धीरे-धीरे सिर-दर्द या माइग्रेन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. फिर इन समस्याओं से निपटने के लिए कई तरह की थेरेपी, दवाइयों और डॉक्टर की सलाह लेते हैं.

    कई रिसर्च रिपोर्ट से यह पता चला है कि तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सिर दर्द से निजात दिलाने में मददगार होती है.

    उपयोग - तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में पकाकर उसे पीने से तनावमुक्त महसूस करने लगते हैं जिससे सिर दर्द कम करने में आसानी होती है.

    जब सिर में दर्द होता है तो हमें चाय पीने की याद आती है यदि उस चाय में तुलसी की कुछ पत्तियां मिला ले तो यह सिर दर्द को कम करने में दुगना असर करती है.

    5. गले की खराश के लिए (For a sore throat)

    सर्दियों में अक्सर या मौसम के परिवर्तन होने से गले में खराश, फ्लू जैसी शिकायतें होने लगती हैं लेकिन कभी-कभी यह समस्याएं गर्मियों में भी हो जाती है.

    गले की खराश, बुखार, सर्दी-जुखाम के लिए भी तुलसी के फायदे एक रामबाण औषधि के रूप में काम करते हैं. बाजार में बहुत से ऐसी आयुर्वेदिक दवाइयां आती है जिनके अंदर तुलसी का उपयोग जरूर किया जाता है.

    उपयोग - ऐसे में तुलसी की पत्तियों का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से काफी आराम मिलता है. तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में उबाल लें और इस पानी से गरारे करने से गले की खराश और गले के दर्द में आराम मिलता है. 

    6. सर्दी-जुकाम में तुलसी के फायदे (Benefits of Tulsi for cold and cough)

    सर्दी-खांसी या बुखार होने पर तुलसी एक कारगर औषधि के रूप में कार्य करती है क्योंकि तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फ्लू और एंटी-बायोटिक गुण पाए जाते हैं जो किसी भी प्रकार के फ्लू से बचाने के लिए लाभप्रद है.

    इसलिए आपने देखा होगा कि कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयों या सिरप में तुलसी का उपयोग जरूर होता है. 

    उपयोग - सर्दी जुखाम या फिर हल्का बुखार होने पर मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर काढ़ा पीने से फायदा मिल सकता है. तुलसी के पत्तों की चाय बनाकर पीने से सर्दी-जुखाम में आराम मिलता है.

    तुलसी खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of basil in hindi


    7. किडनी की पथरी के लिए तुलसी के फायदे (Benefits of Tulsi for kidney stones)

    किडनी में पथरी की शिकायत अधिकतर फिल्टर मैकेनिज्म की खराबी के होने से होती है लेकिन अभी तक इसका कोई निश्चित कारण नहीं है. जैसा कि हम जानते हैं तुलसी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो कई रोगों की दवा है.

    किडनी से पथरी निकालने में तुलसी का उपयोग (तुलसी के फायदे और उपयोग) औषधि के रूप में किया जाता है. गुर्दे की पथरी के पीछे मुख्य कारण यूरिक एसिड होता है तुलसी का उपयोग यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद करती है.

    उपयोग - एक चम्मच उबला हुआ पानी और एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें. यह विधि 3-6 महीने तक करने से पथरी को निकालने में कारगर साबित हो सकता है.

    8. तुलसी के फायदे चेहरे के लिए (Benefits of basil for face)

    खूबसूरत और बेदाग त्वचा पाने के लिए बाजार में उपलब्ध कई तरह के प्रोडक्ट क्रीम, फेस पैक इन सबका इस्तेमाल करते हैं लेकिन शायद घर में ही इस्तेमाल होने वाली तुलसी का उपयोग नहीं करते हैं.

    तुलसी एक औषधि के रूप में त्वचा के लिए काफी गुणकारी होती है क्योंकि इसके अंदर विटामिन ए, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं.

    विटामिन C त्वचा में निखार लाता है और एंटीऑक्सीडेंट तत्व स्किन की गहराई में जाकर सभी टॉक्सिन को बाहर निकालते हैं.

    तुलसी के उपयोग से त्वचा की कई तरह की समस्याओं को भी कम किया जा सकता है जैसे कि एग्जिमा, कील मुंहासे और छोटे-छोटे फोड़े फुंसी आदि.

    उपयोग - तुलसी की पत्तियों को पीसकर उसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की मिला लें फिर इस मिश्रण को पूरे चेहरे पर अच्छे से लगाएं. इस मिश्रण का उपयोग आप हफ्ते में 2 -3 बार कर सकते हैं.

    9. तुलसी के फायदे बालों के लिए (Benefits of basil for hair)

    तुलसी एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसके फायदे अनेक है. बालों की कई तरह की परेशानियां जैसे कि बालों का झड़ना, सफेद होना, दो मुंह बाल, डेंड्रफ होना और बालों का रूखापन दूर करने में तुलसी का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है.

    तुलसी के अंदर एंटीबायोटिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो बालों की गंदगी को साफ करके बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं.

    उपयोग - तुलसी के पत्ते पीसकर रोजना बालों में लगाने से डैंड्रफ की समस्या दूर हो जाती है. इसके अलावा तुलसी के तेल का भी इस्तेमाल करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलर सरकुलेशन सही रूप से होता है जिससे बाल मजबूत और हेल्दी रहते हैं.

    10. स्वस्थ हृदय के लिए (healthy heart)

    ह्रदय की देखभाल और मजबूती के लिए तुलसी एक औषधि के रूप में काम करती है तुलसी के अंदर विटामिन सी, फास्फोरस, कैलशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हृदय संबंधी बीमारियों से बचाव का काम करते हैं.

    तुलसी के उपयोग से कोशिकाओं के अंदर खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रण करने में मदद मिलती है जिस कारण रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और हृदय अच्छे से ब्लड की पंपिंग करता है.

    उपयोग - स्वस्थ हृदय के लिए तुलसी के 10 पत्ते, 5 काली मिर्च और 4 बादाम को अच्छी तरह पीस लें इसे आधा गिलास पानी और एक चम्मच शहद के साथ लें.

    11. कैंसर में तुलसी के फायदे (Benefits of basil in cancer)

    तुलसी के फायदे और उपयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी किया जा सकता है. कई अध्ययनों के अनुसार ज्ञात हुआ है कि तुलसी के अंदर रेडियोप्रोटेक्टिव और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कैंसर ट्यूमर के विकास को रोकने में मदद करते हैं.

    इसके अलावा तुलसी के अंदर यूजिनॉल, एंटी-कैंसर, फाइटोकेमिकल्स जरूरी तत्व होते हैं विभिन्न प्रकार के कैंसर से लड़ने में मदद कर सकते हैं.

    उपयोग - कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए तुलसी के रस का उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है क्योंकि तुलसी को पीसने पर यूजिनॉल तत्व मिलता है जो एंटी-कैंसर तत्व होता है.

    12. डायबिटीज में तुलसी के फायदे (Benefits of basil in diabetes)

    जब शरीर में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है तो मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यदि हम तुलसी के घरेलू उपचार की बात करें तो इसके अंदर मौजूद एंटी-डायबिटिक और हाइपोग्लाइसेमिक जैसे गुण पाए जाते हैं.

    जो शरीर के अंदर ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रण करने में तथा खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करते हैं. 

    उपयोग - तुलसी का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.

    13. कब्ज में तुलसी खाने के फायदे (Beneficial in constipation)

    गलत खानपान की वजह से पाचन तंत्र संबंधित कई बीमारियां उत्पन्न होने लगती है जैसे कि पेट में मरोड़, ऐठन, दर्द, कब्ज, अपच और पेट के अल्सर आदि. तुलसी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो कई बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाती है.

    उपयोग - कब्ज की बीमारी में तुलसी के बीज फायदेमंद होते हैं इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी के साथ 2 ग्राम तुलसी के बीज का सेवन किया जाए तो यह पेट से जुड़ी हुई कई बीमारियों के इलाज में लाभप्रद साबित हो सकती है.

    14. सांस की दुर्गंध मे फायदेमंद (Beneficial in bad breath)

    मुंह की बदबू को दूर करने के लिए तुलसी बहुत ही कारगर औषधि है. इसके लिए तुलसी के 4-5 पत्तों को मुंह में रखकर चबाने से मुंह की बदबू धीरे-धीरे दूर हो जाती है.

    लेकिन तुलसी के पत्तों के अंदर पारा अधिक मात्रा में होता है इसलिए लंबे समय तक पत्तों को ना चबाएं.

    उपयोग - तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गंध चली जाती है.

    तुलसी के पत्ते बुरी सांस, पायरिया, मसूड़ों और दांतों की कई तरह की बीमारियों के लिए भी फायदेमंद होती है.

    तुलसी के पोषक तत्व की मात्रा – (Basil Nutrient Value Per 100 g in hindi)

    According to the USDA National Nutrients Database

    पोषक तत्व (Nutrients) मात्रा (The quantity) अनुशंसित आहार भत्ता (Recommended Dieatry Allowance - The estimated amount of a nutrient per day for good health)
    ऊर्जा (Energy) 23 Kcal 1 %
    कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) 2.65 g 2 %
    प्रोटीन (Protein) 3.15 g 6 %
    टोटल फैट (Total fat) 0.64 g 2 %
    कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) 0 mg 0 %
    फाइबर (Dietary Fiber) 1.60 g 4 %
    फोलटेस (Folates) 68 µg 4 %
    नियासिन (Niacin) 0.902 mg 6 %
    पैंटोथैनिक एसिड (pantothenic acid) 0.209 mg 4 %
    पाइरिडोक्सिन (pyridoxine) 0.155 mg 12 %
    राइबोफ्लेविन (Riboflavin) 0.076 mg 6 %
    थायमिन (Thiamin) 0.034 mg 2.5 %
    विटामिन (Vitamin A) 5275 IU 175 %
    विटामिन (Vitamin C) 18 mg 30 %
    विटामिन (Vitamin E) 0.80 mg 5 %
    विटामिन (Vitamin k) 414.8 µg 345 %
    सोडियम (Sodium) 4 mg 0 %
    पोटेशियम (Potassium) 295mg 6 %
    आयरन (Iron) 3.17 mg 40 %
    मैग्नीशियम (Megnesium) 64 mg 16 %
    मैग्नीज (Manganese) 1.15 mg 57 %
    जिंक (Zinc) 0.81 mg 7 %
    कैल्शियम (Calcium) 177 mg 18 %
    तुलसी खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of basil in hindi

    तुलसी की तासीर | Tulsi ki tasir in hindi

    बहुत से लोगों को यह कंफ्यूजन होता है की तुलसी की तासीर ठंडी होती है या गर्म. तो हम आपको बता दें कि तुलसी की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है.

    तासीर गर्म होने के कारण गर्मियों में इसका उपयोग कम करना चाहिए. तुलसी के बीज की तासीर भी गर्म होती है. 

    तुलसी खाने की सही मात्रा (Right Quantity)

    तुलसी एक घरेलू औषधि होती है जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है. तुलसी की सही मात्रा लेना जरूरी है क्योंकि अधिक मात्रा में तुलसी का सेवन नुकसानदायक हो सकता है.

    • अगर तुलसी का पाउडर का सेवन करते हैं तो 1-3 ग्राम. 
    • तुलसी का स्वरस ले रहे हैं तो 5-10 मिलीग्राम का ही इस्तेमाल करें.
    • तुलसी अर्क का इस्तेमाल करते हैं तो 0.5-1 ग्राम.

    तुलसी का सही मात्रा में सेवन करने के पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

    तुलसी के सेवन का तरीका | How to use basil in hindi

    तुलसी एक दिव्य पौधा होने के अलावा और औषधियों के गुणों का भंडार होती है. तुलसी का उपयोग एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक दवाइयों, चूर्ण, सिरप और कई तरह के प्रोडक्ट बनाने में उपयोग की जाती है.

    लेकिन तुलसी के सेवन करने का सही तरीका पता होना चाहिए तो आइए जानते हैं कि तुलसी का उपयोग कैसे करते हैं?

      1. रोज सुबह खाली पेट तुलसी के 4-5 पत्तों को चबाया जा सकता है लेकिन लम्बे समय तक तुलसी के पतों को मुँह मे न रखें और चबाने के पहले पत्तों को अच्छे से धो लें.

    तुलसी के पत्तों को धूप में सुखाने के बाद इसका पाउडर बनाकर भी उपयोग किया जा सकता है.

      2. खाना बनाते समय तुलसी के पत्तों को मिलाने से खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है और जरूरी पोषक तत्वों की भी प्राप्ति हो जाती है.

      3. तुलसी के 8-10 पत्तों को पानी में डाल दें और कुछ देर बाद उस पानी का सेवन करे.

      4. तुलसी के पत्तों के साथ अदरक, शहद, लोंग मिलाकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े का सेवन करें इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी.

      5. तुलसी के पत्तों की चाय का सेवन कर सकते हैं और आजकल तो बाजारों में तुलसी ग्रीन टी भी उपलब्ध है.

      6. जब घर में नॉर्मल चाय पीते हैं तो इसमें तुलसी के 5-6 पत्तों को डालने से चाय एक औषधि के रूप में काम करती है.

    तुलसी खाने के नुकसान | Side effects of basil in hindi

    तुलसी का सेवन अगर सही मात्रा और सही रूप से किया जाए तो यह फायदेमंद होती है. लेकिन तुलसी की तासीर गर्म होने से या अधिक मात्रा में सेवन करने से इसके नुकसान भी हो सकते हैं जैसे कि.

      ▪ तुलसी की तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दियों में इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. तासीर गर्म होने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है जिससे फोड़े-फुंसी और नकसीर जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

      ▪ जो लोग डायबिटीज की दवा ले रहे हैं उन्हें तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए.

      ▪ तुलसी शरीर में खून को पतला करने का काम करती है इसलिए इसके अधिक सेवन से रक्तस्राव की समस्या हो सकती है.

      ▪ तुलसी के अंदर पोटेशियम की मात्रा पाई जाती है इसलिए जो लोग ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे हैं उन्हें तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए या सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

      ▪ गर्भावस्था में तुलसी का सेवन करने से बचना चाहिए. जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं उन्हें भी तुलसी का सेवन करने में सावधानी बरतनी चाहिए.

      ▪ तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करने से फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है जिससे स्पर्म काउंटिंग की संख्या भी कम हो जाती है.

    आखिरी शब्द | Last word in hindi

    हिंदू शास्त्रों में तुलसी को देवी का दर्जा दिया गया है क्योंकि यह पूजनीय तो होती ही है इसके अलावा औषधीय गुणों का भंडार होती है. जितने फायदे तुलसी के पत्ते खाने के होते हैं उतने ही फायदे इसके बीज और जड़ के भी होते हैं.

    इस लेख को पढ़कर यह ज्ञान मिलता है कि तुलसी खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं? तुलसी के सेवन का तरीका, तुलसी की तासीर कैसी होती है, इसकी मात्रा और नुकसान के बारे में.

    तुलसी के उपयोग की अगर साधारण सी बात करें तो सुबह खाली पेट तुलसी के 5-6 पत्तों को मुंह में रखकर जरूर चबाये.

    आशा करते हैं कि यह जानकारी आपके काम आए जिससे आप भी तुलसी का उपयोग कर सकें.

    तुलसी से संबंधित प्रश्न | FAQ

    Q. तुलसी की तासीर कैसी होती है?

    A. तुलसी की तासीर गर्म प्रकृति की होती है इसलिए इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए.

    Q. तुलसी के पत्ते खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं?

    A. तुलसी के पत्ते खाने के कई फायदे होते हैं जैसे कि तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, स्वस्थ हृदय, कैंसर में फायदेमंद, त्वचा, बालों के लिए लाभदायक, पथरी निकालने में कारगार, सर्दी-जुखाम, खांसी, गले की खराश और सिर दर्द आदि.

    Q. तुलसी के बीज की तासीर कैसी होती है?

    A. तुलसी के बीज की तासीर गर्म प्रकृति की होती है.

    Q. तुलसी के पत्ते क्यों नहीं खाना चाहिए?

    A. तुलसी के पत्ते इसलिए नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें पारा की मात्रा अधिक होती है. तुलसी के पत्ते हम खा सकते हैं लेकिन लंबे समय तक इसे मुंह में ना रखें क्योंकि यह दांतों के लिए हानिकारक हो सकता है.

    Q. तुलसी का उपयोग कैसे किया जाता है?

    A. तुलसी को कुछ पत्तों को मुंह में रखकर चबा सकते हैं, तुलसी का अर्क, तुलसी की चाय और तुलसी का काढ़ा बनाकर उपयोग कर सकते हैं.

    Q. तुलसी के आयुर्वेदिक गुण कौन से हैं?

    A. तुलसी के अंदर कई तरह के आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं जैसे कि एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक, मिथाइल, ट्रैनिन, सैवोनिन, ग्लाइकोसाइड आदि.

    धन्यवाद.

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