किडनी (गुर्दा) खराब होने का कारण, लक्षण और उपाय | Symptoms of kidney failure in hindi

किडनी (गुर्दा) खराब होने का कारण, लक्षण और उपाय | Symptoms of kidney failure in hindi
किडनी खराब होने के कारण, इसके लक्षण, किडनी बीमारी में क्या खाएं और क्या ना खाएं.

शरीर में सभी अंगों का अपना ही महत्व होता है जब शरीर के सभी अंग अच्छे से काम करते हैं तो शरीर बिल्कुल स्वस्थ होता है, हमें किसी प्रकार का रोग नहीं होता है.

हम अपने इस लेख में जानेंगे कि किडनी के क्या कार्य होते हैं, किडनी रोग के लक्षण, खराब (kidney failure) होने के कारण और किडनी रोग में परहेज.

किडनी की खराबी किसी गंभीर बीमारी का कारण या मौत का कारण भी बन सकती है. शरीर के अंदर ह्रदय, फेफड़े, लीवर जिनका अपना एक महत्वपूर्ण कार्य होता है.

उसी तरह से किडनी(गुर्दा) का भी शरीर के अंदर एक बड़ी भूमिका होती है. आइए जानते हैं शरीर के अंदर किडनी का क्या कार्य होता है.


    किडनी का कार्य | Kidney function in hindi

    हम प्रतिदिन जो भोजन ग्रहण करते हैं वह भोजन पानी की मात्रा, अम्ल और क्षार(Liquid substance) पदार्थों में परिवर्तित होता रहता है.

    भोजन के दौरान बहुत से ऐसे अनावश्यक या विषैले पदार्थ(Toxin) होते हैं जो शरीर के अंदर उत्पन्न हो जाते हैं.

    यदि शरीर के अंदर यह विषैले पदार्थ, शरीर में पानी की मात्रा, और अन्य रसायन पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.

    किडनी का महत्वपूर्ण कार्य यही होता है कि वह पेशाब के द्वारा शरीर के अंदर मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालती रहे जिससे शरीर स्वस्थ और स्वच्छ रहे.

    1. विषैले पदार्थों को बाहर निकालना (Toxin out)

    जब हम प्रतिदिन आहार ग्रहण करते हैं उससे हमारे शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन मिलता है जिससे हमारे अंग और शरीर विकसित होता है. लेकिन इस प्रोटीन के द्वारा कुछ अपशिष्ट पदार्थ शरीर के अंदर रह जाते हैं.

    तब किडनी अपनी कार्य की भूमिका को निभाती है और इन अपशिष्ट(Toxin) पदार्थों को मूत्र के द्वारा बाहर निकालती है तथा खून का शुद्धिकरण करती है.

    2. खून का शुद्धिकरण करना (Blood purification)

    किडनी का यह महत्वपूर्ण कार्य है की यह शरीर के अंदर लगातार खून का शुद्धिकरण करती रहती है जिससे शरीर के अंदर मौजूद विषैले तत्व पेशाब द्वारा बाहर निकलते रहते है.

    जिस कारण शरीर के अंदर तरल पदार्थों का संतुलन बना बना रहता है.

    3. पानी की मात्रा बनाए रखना (Retaining water content)

    जब शरीर के अंदर पानी की अधिक मात्रा हो जाती है तो किडनी जरूरी पानी की मात्रा को रखते हुए बाकी पानी को पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है. 

    जिससे पानी की मात्रा और तरल पदार्थों का संतुलन बना रहता है. जब शरीर में किडनी खराब हो जाती है तो यह अतिरिक्त पानी को मूत्र के द्वारा बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती है.

    जिस कारण शरीर के अंदर तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ने लगता है और शरीर पर सूजन आ जाती है जो एक किडनी खराबी या बीमारी का लक्षण है.

    4. अम्ल और क्षार का संतुलन बनाए रखना (Retaining Liquid substance)

    किडनी शरीर के अंदर बहुत से ऐसे रासायनिक पदार्थों का संतुलन बनाए रखती है जिससे शरीर के अंदर असंतुलन पैदा ना हो जैसे कि सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि.

    क्योंकि इन सब पदार्थों का बढ़ना या घटना शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है जैसे कि सोडियम की मात्रा बढ़ने या घटने से हमारे दिमाग पर असर हो सकता है.

    पोटेशियम की मात्रा बढ़ने या घटने से ह्रदय की घातक बीमारियां हो सकती हैं. मैग्नीशियम पदार्थ के बढ़ने या घटने से हमें डिप्रेशन, थकान, चिंता महसूस होने लगती है.

    5. हड्डियों की मजबूती (Bone firming)

    किडनी शरीर में विटामिन D को सक्रिय रूप से परिवर्तित करती रहती है जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है. 

    जब हम भोजन करते हैं किडनी उस आहार से कैल्शियम और कई अन्य पोषक तत्वों को अवशोषित करती है जिससे हड्डियों को जरूरी पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है.

    6. खून की कमी और दवाब पर नियंत्रण (Anemia and control blood pressure)

    किडनी शरीर के अंदर कई तरह के हार्मोन बनाती रहती है इन हार्मोन की मदद से शरीर के अंदर तरल पदार्थों का संतुलन बना रहता है इस संतुलन की वजह से ही शरीर में खून का दबाव(Blood pressure) समान रहता है.

    किडनी खून के अंदर कई तरह के लाल रक्त कणिकाओं को भी उत्पादन करती है जिससे शरीर के अंदर खून की कमी पूरी होती रहती है.

    किडनी (गुर्दे) रोग के लक्षण | Symptoms of kidney disease in hindi

    किडनी(गुर्दे) की बीमारी होने पर शरीर में कुछ शुरुआती लक्षण या संकेत दिखने लगते हैं तो आइए जानते हैं किडनी लक्षणों के बारे में.

    ⇨ जब किडनी की बीमारी हो जाती है तो शरीर में सूजन होने लगती है यह सूजन आंखों, हाथों, पैरों मे दिखाई देने लगती है.

    ⇨ किडनी की बीमारी होने पर शरीर के अंदर तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे हाई ब्लड प्रेशर बीमारी होने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

    ⇨ सांस फूलना, जल्दी थक जाना, शरीर में पीलापन दिखना भी किडनी की बीमारी का एक संकेत हो सकता है.

    ⇨ शरीर का वजन धीरे-धीरे कम होने लगना, नींद ना आना, मुंह में बदबू आना, मुंह का स्वाद बिगड़ जाना भी किडनी की बीमारी के लक्षण है.

    ⇨ जब हमें किडनी की बीमारी होने लगती है तो हमारी मांसपेशियों में ऐंठन, मरोड़ महसूस होने लगती है.

    ⇨ त्वचा में रूखापन होना और लगातार खुजली होना भी किडनी की बीमारी के लक्षण है.

    ⇨ पेशाब की मात्रा में कमी आना, दर्द महसूस होना, पेशाब में रुकावट या परेशानी होना.

    ⇨ शरीर में तरल पदार्थों के असंतुलन खून की कमी भी होने लगती है जिसे हम एनीमिया की बीमारी को कहते हैं. 

    भूख की कमी, उल्टी, मतली, जी मचलना जैसे आम लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं.

    किडनी या गुर्दे फेल होने के प्रकार | Types of kidney failure in hindi

    किडनी या गुर्दा ख़राब (Fail) होने के प्रमुख रूप से दो प्रकार बताए गए हैं.

    1. एक्यूट किडनी फेलियर (Acute Kidney Failure)

    2. क्रोनिक किडनी फेलियर (Value Chronic Kidney Failure)

    ➤ एक्यूट किडनी फेलियर (Acute Kidney Failure)

    • एक्यूट किडनी फेलियर की बीमारी शरीर में अचानक पैदा हो जाती है.
    • सारे शरीर में सूजन आने लगती है, त्वचा में खुजली होने लगती है.
    • मूत्र त्यागने में दर्द और मूत्र की कमी आ जाती है.
    • रोगी का वजन भी दिन प्रतिदिन बढ़ने लगता है.
    • जिन व्यक्ति की किडनी खराब होने लगती है उन्हें उल्टी, मतली तथा थकान आने की समस्याएं होने लगती हैं.
    • कई बार गुर्दों पर चोट लगने से भी गुर्दे फेल होने के कारण बन सकते हैं.

    ➤ क्रोनिक किडनी फेलियर (Value Chronic Kidney Failure)

    • क्रॉनिक किडनी फेलियर में किडनी फेल होने की समस्या धीरे-धीरे उत्पन्न होती है.
    • पहले हमें इस बीमारी में के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं लेकिन धीरे-धीरे हमें थकान, सुस्ती, सिर-दर्द, हाथ-पैर दर्द, जैसे लक्षण पैदा होने लगते हैं.
    • रोगियों के पैरों में खिंचाव आना, मांसपेशियों में मरोड़, ऐठन होना, खिंचाव आना तथा हाथ पैरों में सुन्नता होना भी इस रोग के लक्षण है.
    • जब यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है तो रोगी का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है.
    • भूख कम होने लगती है, उल्टी, जी मचलाना, मुंह का स्वाद खराब होना, मुंह से बदबू आना जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं.

    किडनी खराब होने का कारण | Cause of kidney failure in hindi

    यदि किडनी को सुरक्षित रखना है तो हमें कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है तो आइए जानते हैं किडनी की बीमारी से बचने के टिप्स(Tips).

    1. तरल पदार्थों की कमी (Fluid intake)

    किडनी फेल होने का कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी का होना, क्योंकि यदि शरीर के अंदर पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं होगा तो इससे शरीर के विषैले तत्व(Toxin) पेशाब के द्वारा बाहर नहीं निकल पाएंगे.

    जिससे शरीर के अंदर तरल पदार्थों और रासायनिक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाएगा. इसलिए किडनी को सुरक्षित रखने के लिए दिन भर में 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीएं.

    2. गंभीर बीमारियों का होना (Serious illnesses)

    जब शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है तो हमें डायबिटीज बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से हार्ट-अटैक, हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां होने लगती है.

    जिससे किडनी के कार्य करने की क्षमता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. इसलिए किडनी को सुरक्षित रखने के लिए इन बीमारियों का भी ध्यान रखना होता है.

    3. नशीली चीजों का सेवन (Drug abuse)

    अधिक मात्रा में शराब और धूम्रपान करने से रक्त वाहिकाओं पर बहुत बुरा असर पड़ता है जिससे वह धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है और शरीर में खून का शुद्धिकरण अच्छे से नहीं हो पाता है.

    जिस कारण किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होती है और यह धीरे-धीरे खराब होने लगती है. इसलिए किडनी को सुरक्षित रखने के लिए हमें अधिक मात्रा में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए.

    किडनी (गुर्दा) खराब होने का कारण, लक्षण और उपाय | Symptoms of kidney failure in hindi
    किडनी खराब होने के कारण या किडनी बीमारी से बचने के टिप्स.

    4. पेशाब रोकने से (Stop urinating)

    पेशाब को रोकना किडनी के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है. पेशाब को रोकने से किडनी के अंदर पथरी(stone) की समस्या बढ़ सकती है, ऐसे में किडनी को नुकसान पहुंच सकता है.

    इसलिए जब भी पेशाब आए तुरंत करें उसे ज्यादा देर तक ना रोके.

    5. अधिक औषधियों का सेवन (Use of more drugs)

    जब हम अधिक मात्रा में पेनकिलर दवाइयों का सेवन करते हैं तो किडनी बहुत ही जल्द प्रभावित होने लगती है, क्योंकि पेनकिलर दवाइयों का काफी बुरा असर किडनी पर पड़ता है.

    जिनके गुर्दे पहले से ही कमजोर होते हैं उन्हें पेनकिलर दवाइयों का सेवन डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए.

    6. ज्यादा नमक का सेवन (High salt intake)

    अधिक मात्रा में नमक का सेवन करने से शरीर के अंदर सोडियम की मात्रा बढ़ने लगती है जिससे किडनी पर ज्यादा जोर पड़ता है और किडनी से संबंधित समस्याएं धीरे-धीरे उत्पन्न होने लगती हैं. इसलिए नमक का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें.

    7. अन्य कारण (Other reason)

    कुछ और भी कारण हो सकते हैं जिनसे हमें किडनी की बीमारी हो सकती है जैसे कि दुर्घटना से किडनी में चोट का लगना, गुर्दे में सूजन, संक्रमण का होना, लंबे समय तक किसी बीमारी से ग्रसित रहना, डिहाइड्रेशन, पर्याप्त नींद न लेना आदि.

    किडनी की बीमारी होने पर क्या खाएं | What to eat in hindi

    जब शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी हो जाती है तो उस बीमारी को ठीक करने के लिए हमें दवाइयों की आवश्यकता तो होती ही है साथ में परहेज करने की भी आवश्यकता होती है तो आइए जानते हैं किडनी रोग में परहेज.

    किडनी फेल होने पर ऐसे पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमें नमक और फास्फोरस की मात्रा कम पाई जाती हो और पोटेशियम की मात्रा भी नियंत्रित होनी चाहिए.

    सब्जियां – तोरई, परवल, टिंडा, लाल मूली, शिमला मिर्च, फूल गोभी, बंद गोभी, करेला, हरा धनिया आदि.

    फल – अंगूर, स्ट्रॉबेरी, पपीता, अनार, सेब, पाइनएप्पल, तरबूज, नींबू, आमला आदि. गुर्दे फेल होने पर फल खाने से बहुत फायदा होता है क्योंकि यह हमारे मूत्र की मात्रा को बढ़ा देते हैं जिससे शरीर में जमे हुए विषैले तत्व मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाते हैं.

    धान्य – गेहूं, मक्का, जौ, चावल से बने हुए हल्के खाद्य पदार्थ.

    अन्य - सूखे मेवे में अखरोट, मूंग दाल, अरहर दाल, मसूर दाल, सरसों का तेल, लहसुन, पुदीना, जैतून का तेल आदि.

    किडनी की बीमारी में क्या ना खाएं | Not to eat in hindi

    ⇨ अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ, मसालेदार भोजन, अधिक मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.

    ⇨ तरल पदार्थों, प्रोटीन का भी सेवन नियंत्रित मात्रा में ही करना चाहिए अन्यथा गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

    ⇨ जिन लोगों को किडनी की बीमारी हो उन्हें उबली हुई सब्जियों का ही सेवन करना चाहिए अतिरिक्त तेल मसाले यह तड़का वाली सब्जियों का सेवन भूलकर भी ना करें.

    ⇨ फल एवं सब्जियां - कीवी फल, केला, कच्चा आम, किशमिश, टमाटर, खजूर, आलू, बैगन, कटहल, भिंडी आदि.

    ⇨ रोटी के स्थान पर चावल का सेवन करना अधिक हितकारी है.

    निष्कर्ष | The conclusion

    इस पूरे लेख को पढ़कर हमें यह जानकारी मिलती है कि जिस तरह शरीर के कई अंग अपने कार्यों को करते हैं उसी प्रकार किडनी भी अपने महत्वपूर्ण कार्य को निभाती है.

    यदि हमें स्वस्थ रहना है तो किडनी से होने वाली बीमारीओं से भी बचना होगा जैसे कि यूरिक एसिड का बढ़ना, गुर्दे फेल होना और किडनी में पथरी का होना आदि.

    प्राचीन लेखों के अनुसार एक लोक कहावत इस प्रकार है.

    खाइए के सोवे बाम |

    कबहुं ना वैध बुलावे गाम।

    अर्थात भोजन करने के बाद जो व्यक्ति मूत्र त्याग करता है तथा हमेशा खाना खाने के बाद बाई करवट लेकर सोता है वह सदैव स्वस्थ होता है.

    धन्यवाद.

    Share Post

    0 Comments: