जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi

जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi
जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi

जीरा भारतीय मसाले के रूप में प्रसिद्ध है जिसका उपयोग सभी प्रकार के व्यंजनों को बनाने में और स्वाद बढ़ाने में करते आ रहे हैं.

लेकिन क्या आपको पता है कि जीरे का उपयोग स्वाद बढ़ाने के अलावा सदियों से स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं.

इसलिए इस आर्टिकल के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे कि जीरा खाने के फायदे और नुकसान, भुना हुआ जीरा खाने के फायदे, जीरा की तासीर, जीरा के घरेलू उपयोग के बारे में?

जीरे की  ORAC वैल्यू  50372 per 100 gm  होती है. ORAC (oxygen radical absorbance capacity) का मतलब ऑक्सीजन रेडिकल अवशोषण क्षमता है. यह किसी भी खाद्य पदार्थ की कुल एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को मापने का पैमाना है. जीरे  की ORAC वैल्यू अधिक होने से इसके अंदर एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा पाई जाती है.

जीरा एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होने के अलावा और भी कई तरह के विटामिन का भंडार है जैसे कि 
ऊर्जा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन,  मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सोडियम, कॉपर, विटामिन C, विटामिन E, विटामिन K और भी कई पोषक तत्व होते हैं जो सेहत को स्वस्थ बनाते हैं.

    जीरा क्या है | What is cumin in hindi 

    • जीरे का वानस्पतिक नाम क्यूमिनम सायमिनम है.
    • जीरा का कुल – एपिएसी. 
    • जीरा गरम प्रकृति वाला मसाला है.
    • जीरा तीन प्रकार का होता है काला जीरा, सफ़ेद जीरा जंगली जीरा.
    • जीरे का सबसे जयादा उत्पादन भारत मे राजस्थान मे होता है.
    • जीरा का पौधा एक 1-3 फुट ऊंचा, फल लंबे छोटे सफेद कत्थई रंग के होते हैं.

    अन्य भाषाओं में जीरा के नाम – Cumin Seeds name in other languages

    भाषा (Language) अर्थ (meaning)
    हिंदी (Hindi) जीरा, सफेद जीरा, साधारण जीरा
    उर्दू (Urdu) जीराह (Jirah)
    अंग्रेजी (English) क्यूमिन (Cumin)
    बंगाली (Bengali) जीरे (Jere), सादा जीरे (Sada jere)
    गुजराती ( Gujarati) जीरू (Jeenru)
    नेपाली (Nepali) जीरा (Jira)
    मराठी (Marathi) जिर्रे (Jirre)

    जीरा खाने के बेहतरीन फायदे | Benefits of cumin in hindi

    जैसे फलों के अंदर कई तरह के विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए जरूरी होते हैं उसी तरह कई भारतीय मसाले जो एक प्राकृतिक जड़ी बूटी के रूप में सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं.

    जीरे का उपयोग कैसे करना है यह लेख मे आगे बताया है? आइए जानते हैं जीरा खाने के फायदे क्या है?

    1. पाचन क्रिया के लिए जीरे के फायदे


    आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में हर किसी के पास समय की कमी है जिस वजह से वह अपने खाने-पीने पर सही तरीके से ध्यान नहीं दे पाते हैं, तत्पश्चात शरीर मे कई तरह की गंभीर समस्याएं होने लगती है.

    जैसे की खट्टी डकार आना, भोजन का ना पचना, गैस बनना, मरोड़ आदि. इन सारी समस्याओं को कम करने के लिए जीरे का इस्तेमाल एक औषधि के रूप में कर सकते हैं.

    आयुर्वेद में भी जीरे का इस्तेमाल पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए सदियों से किया जा रहा है और अभी भी आयुर्वेदिक दवाइयों में जीरे का पाउडर इस्तेमाल किया जा रहा है.

    हर 100 ग्राम जीरे मे 10.5 g फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को दुरस्त करने मे उपयोगी है.


    2. इम्युनिटी बढ़ाने में जीरे के फायदे


    यदि स्वस्थ रहना है और बाहरी संक्रमण से संक्रमित होने से बचना है तो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना होगा.

    आपके शरीर की जितनी इम्युनिटी मजबूत होगी उतना ही आप बाहरी बीमारियों के संक्रमण या इंफेक्शन से बचे रहेंगे.

    जीरा एक ऐसी औषधि है कि इसका इस्तेमाल इम्युनिटी बढ़ाने में कर सकते हैं, क्योंकि इसके अंदर विटामिन C (7.7 mg), एंटीऑक्सीडेंट गुण और आयरन (66.36 mg) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी तत्व है.

    इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जीरे के पानी का सेवन कर सकते हैं.


    3. जीरे का उपयोग वजन घटाने के लिए


    गलत लाइफ़स्टाइल और खानपान की वजह से शरीर का मेटाबॉलिज्म स्तर घटता जाता है जिससे धीरे-धीरे शरीर पर अनावश्यक चर्बी बढ़ने लगती है जिसे बैली फैट कहते हैं.

    आप विश्वास मानिए जीरा एक ऐसी औषधि है जो आपके वजन या मोटापे को काफी हद तक कम कर सकती है.

    कई अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि 3 हफ्ते तक यदि हम जीरे के पानी का सेवन खाली पेट करते हैं तो यह हमारे वजन को बड़ी तीव्र गति से कम कर सकता है.

    साथ ही यह पाचन शक्ति और चयापचय क्रियाओं को भी उत्तेजित करता है जिससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रण रहता है.


    4. एनीमिया बीमारी में जीरे के फायदे


    जब शरीर में खून की कमी हो जाती है तो थकान, चक्कर आना, जी घबराना, चिंता जैसी छोटी-छोटी बीमारियां होने लगती है.

    एनीमिया का सबसे बड़ा कारण होता है कि जब शरीर में लौह तत्व की कमी हो जाती है. इसी कमी को पूरा करने के लिए जीरा या जीरे के पाउडर का सेवन कर सकते हैं.

    100 ग्राम जीरे के अंदर 66.36 mg आयरन की मात्रा और 375 कैलोरी ऊर्जा होती है. जो शरीर को ऊर्जा और आयरन प्रदान करते है जिस कारण एनीमिया जैसी बड़ी बीमारी के शिकार होने से बच जाते हैं.

    जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi
    जीरा खाने के 10 फायदे | Benefits of cumin

    5. पेट दर्द के लिए


    जीरा (खाने के फायदे और नुकसान ) का सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द और गैस, कब्ज जैसी बीमारियों से भी हमें छुटकारा मिल सकता है. पेट दर्द में जीरे का पानी पी सकते हैं और इसे भून कर भी इस्तेमाल करते हैं.

    जीरे के अंदर दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं जो दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं.


    6. मासिक धर्म में जीरे के गुण


    मासिक धर्म के समय महिलाओं को बहुत पीड़ा सहनी पड़ती है जैसे कि पेट में ऐठन, दर्द, मतली आदि. मासिक धर्म के दौरान दर्द को कम करने के लिए भी जीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं.

    क्योंकि जीरे के अंदर दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं जो मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम कर सकते है.


    7. जीरे का उपयोग त्वचा के लिए


    जीरे का इस्तेमाल अपनी त्वचा की देखभाल के लिए कर सकते हैं जीरे के अंदर ऐसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के विभिन्न अंगों के लिए फायदेमंद होते हैं.

    100 ग्राम जीरे के अंदर 3.3 mg विटामिन E और 7.7 mg विटामिन C पाया जाता है जो त्वचा की देखभाल के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं.

    त्वचा की देखभाल, जवान दिखने के लिए, कील-मुंहासे, झुर्रियां आदि इन सब से छुटकारा पाने के लिए विटामिन E पोषक तत्व की जरूरत होती है.

    कई अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि विटामिन E और C के अंदर पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण धूप, त्वचा के कैंसर, एंटी-फंगल और एंटी- बैक्टीरियल संक्रमण से भी बचाए रखते हैं.

    इसलिए त्वचा को हमेशा जवां बनाए रखने के लिए जीरे के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं.


    8. स्ट्रेस से रखें दूर


    जीरा के अंदर अच्छी मात्रा में विटामिन C पाया जाता है जो एक प्रकार का एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होता है. जो शरीर और दिमाग को तनाव से मुक्त रखने में मदद करता है.

    कई अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि जीरा तनाव को कम करने और तनाव प्रतिक्रियाओं को कम करने में मदद करता है.


    9. जीरे के फायदे बालों के लिए


    जीरा का उपयोग बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, जीरे के अंदर ऐसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनसे बालों को विटामिंस मिलते हैं जो बालों की देखरेख के लिए जरूरी होते हैं.

    बालों में डैंड्रफ होना एक आम समस्या है, जिसको खत्म करने के लिए एंटी-फंगल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्वों की जरूरत होती है जो जीरे के अंदर पाए जाते हैं.

    100 gm जीरे के अंदर 3.3 mg विटामिन ई पाया जाता है जो बालों की देखभाल के लिए उपयोगी हैं.

    10. डायबिटीज में जीरे के फायदे


    जीरा का सेवन या इसके पानी का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है.

    क्योंकि बहुत से अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि जीरे के अंदर एंटी डायबिटिक (anti-diabetic) गुण पाए जाते हैं जो शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को नियंत्रण करते हैं और मधुमेह जैसी बीमारियों में को कम करने में मदद कर सकते हैं.

    जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi
    आइए आगे और भी जानते हैं | Let's know more

    जीरे के घरेलू उपाय | Cumin home remedies in hindi

    ▸ मुंह में बदबू आने पर जीरे को भूनकर खाने से मुंह की बदबू दूर हो जाती है.

    ▸ दो चम्मच जीरा एक कप पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसे छानकर पी लें. इसे पीने से शरीर में शक्ति वर्धक यानी कि शरीर की ताकत बढ़ती है.

    ▸ जीरे को बारीक पीसकर सुरमे की तरह आंखों में लगाने से नेत्र रोग दूर हो जाते हैं.

    ▸ 10 ग्राम पिसा हुआ जीरा एक कप पानी में भिगोकर रख दें. सुबह के समय उस पानी में मिश्री मिलाकर नित्य हर रोज पीने से हृदय रोग में लाभदायक होता है.

    ▸ एक चम्मच जीरा और एक चम्मच सौंफ पीसकर आधा चम्मच शहद में मिलाकर खाने से खांसी ठीक हो जाती है.

    ▸ जीरा और मिश्री समान मात्रा में पीसकर एक-एक चम्मच तीन बार ठंडे पानी के साथ फंकी लें तथा जीरा पानी में पीसकर गुदा पर लेप लगाएं इससे बवासीर की सूजन और दर्द में लाभ होता है.

    ▸ जीरा बारीक पीसकर घी में गर्म करके मस्सों पर लगाएं इसे लगाने पर बवासीर से होने वाले मस्सों के दर्द में आराम मिलता है.

    ▸ एक चम्मच जीरा एक कप पानी में उबालें अच्छी तरह उबलने के बाद छानकर इस पानी को पी ले इससे हमारे शरीर का तापमान कम होगा. बुखार आने पर एक चम्मच भर जीरे को गुड़ के साथ रोज तीन बार लेने से बुखार भी कम हो जाता है.

    ▸ जीरा का सेवन हमारी याददाश्त के लिए काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि जीरे के अंदर एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो याददाश्त को बढ़ाने में मदद करते हैं.

    ▸ जीरे के अंदर कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद होता है.

    ▸ एक चम्मच जीरा एक कप पानी में भिगोकर रख दें सुबह के समय उस पानी को छानकर उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाएं और इसे पी ले. हर रोज ऐसा करने से वजन बहुत तेजी से घटता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म स्तर भी नियंत्रण रहता है.

    ▸7 ग्राम काले जीरे को आधा लीटर पानी में मिला दें और इस पानी को उबालकर इसका काढ़ा बना लें. जब इस पानी का काढ़ा बन जाए तो इससे अपनी आंखों को धोएं इससे आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

    जीरा के पोषक तत्वों की मात्रा – (Cumin Nutrient Value Per 100 g in hindi)

    पोषक तत्व (Nutrients) मात्रा (The quantity) अनुशंसित आहार भत्ता (Recommended Dieatry Allowance - The estimated amount of a nutrient per day for good health)
    ऊर्जा (Energy) 375 Kcal 19 %
    कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) 44.24 g 34 %
    प्रोटीन (Protein) 17.8 g 32 %
    टोटल फैट (Total fat) 22.27 g 74 %
    कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) 0 mg 0 %
    फाइबर (Dietary Fiber) 10.5 g 26 %
    फोलटेस (Folates) 10 µg 2.5 %
    नियासिन (Niacin) 4.58 mg 28.5 %
    पाइरिडोक्सिन (pyridoxine) 0.435 mg 33 %
    राइबोफ्लेविन (Riboflavin) 0.32 mg 24.5 %
    थायमिन (Thiamin) 0.628 mg 52 %
    विटामिन (Vitamin A) 1270 IU 42 %
    विटामिन (Vitamin C) 7.7 mg 13 %
    विटामिन (Vitamin E) 3.3 mg 22 %
    विटामिन (Vitamin k) 5.4 µg 4.5 %
    सोडियम (Sodium) 1788 mg 38 %
    पोटेशियम (Potassium) 68 mg 11 %
    आयरन (Iron) 66.36 mg 829 %
    मैग्नीशियम (Megnesium) 366 mg 91 %
    मैग्नीज (Manganese) 3.3 mg 145 %
    जिंक (Zinc) 4.8 mg 43.5 %
    कैल्शियम (Calcium) 931 mg 93 %
    कॉपर (Copper) 0.867 mg 96 %

    भुना जीरा खाने के फायदे | Benefits of roasted cumin in hindi

    जीरा खाने के फायदे और नुकसान | Benefits of Cumin in hindi
    भुना जीरा खाने के फायदे | Benefits of eating roasted cumin

    जैसा कि पहले पढ़ चुके हैं कि जीरा के अंदर बहुत से ऐसे पोषक तत्व, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो सेहत को सेहतमंद रखने के लिए जरूरी होते हैं.

    वह कहावत तो आपने सुनी ही होगी जो खाए जीरा वह बनेगा हीरा.

    एक चम्मच जीरा को भूनकर यदि हम सुबह खाली पेट पानी के साथ का सेवन करते हैं या रात में खाना खाने के बाद एक चम्मच जीरा चबाने के बाद पानी पिए तो इससे स्वास्थ्य को कई लाभ (जीरा के लाभ) होते हैं.

    एक हफ्ते में 1-2 बार भुने जीरे का सेवन जरूर करना चाहिए इससे धीरे-धीरे अपने आप को स्वस्थ महसूस करने लगेंगे.

    जीरा पानी बनाने का तरीका | How to make cumin water in hindi

    • एक बर्तन में दो चम्मच जीरा और पानी मिला लें.
    • फिर इसे हल्की आंच पर 5 से 8 मिनट तक गर्म करें.
    • जैसे ही पानी हल्का पीला होने लगे आंच को बंद कर दें.
    • फिर इस पानी को छान कर ठंडा होने पर आप इसे पी सकते हैं.
    • दूसरा तरीका 1 या 2 चम्मच जीरा रात भर पानी में भिगोकर रख दें.
    • और सुबह उस पानी को छानकर आप पी सकते है.

    वजन कम करने के लिए जीरा पानी के फायदे | Benefits for lose weight in hindi

    एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा रात में भिगोकर रख दें और सुबह उस पानी को छान लें, उसमें थोड़ा शहद और नींबू मिलाकर आप इस पानी को पी सकते हैं.

    यह पानी आपकी बॉडी के लिए एक एंटी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, क्योंकि जीरे के अंदर आयरन, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और बहुत से ऐसे तत्व होते हैं जो पाचन क्रिया दुरुस्त करते हैं और मेटाबोलिज्म के स्तर को बढ़ाते हैं.

    जीरा की तासीर | jeera ki taseer in hindi

    जैसा कि लेख में पड़ चुके हैं कि जीरा का उपयोग व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए तो करते ही हैं लेकिन जीरे का उपयोग औषधीय जड़ी बूटी के रूप में भी करते आ रहे हैं.

    किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले उसकी तासीर के बारे में पता होना चाहिए, जीरे की तासीर ठंडी होती है या गर्म.

    जीरे की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका उपयोग अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए.

    जीरे के नुकसान | Side effects of Cumin in hindi

    हर चीज के अपने फायदे भी होते हैं और नुकसान भी. आइए जानते हैं जीरे के अधिक मात्रा के सेवन से शरीर को क्या नुकसान हो सकते हैं?

    1. जीरे की तासीर गर्म होती है इसलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए और गर्भवती महिलाओं को भी जीरे का सेवन डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए.

    2. यदि हम जीरे के पानी का सेवन कर रहे हैं तो हमारे शरीर या त्वचा को किसी भी प्रकार की एलर्जी महसूस होती है तो हमें इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

    3. जीरे का अधिक मात्रा में सेवन करने से स्वसन समस्याएं और कैंसर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

    4. जीरा का अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं.

    पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ

    Q1. जीरे की तासीर कैसी होती है?

    A. जीरे की तासीर गर्म प्रकृति की होती है.

    Q2. क्या जीरे का पानी हमारे वजन को कम कर सकता है?

    A. जी हां यदि हम सुबह-शाम जीरे के पानी का सेवन करते हैं तो यह हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म स्तर को बढ़ाता है और हमारे मोटापे को धीरे कम करता है.

    Q3. जीरा के आयुर्वेदिक फायदे क्या है?

    A. जीरा के सेवन से हमारे शरीर को कई फायदे होते हैं जैसे कि वजन कम करने में,पाचन क्रिया, सर्दी- बुखार, बढ़ाने में, पेट दर्द, मासिक धर्म, इम्यूनिटी और डायबिटीज आदि.

    Q4. जीरा पानी कैसे बनाते हैं?

    A. एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा रात में भिगोकर रख दें और सुबह उस पानी को छान लें और उसमें थोड़ा शहद और नींबू मिलाकर आप उस पानी को पी सकते हैं.

    आखिरी शब्द | Last word

    हमें अपने व्यस्त जीवन में कुछ ऐसे आयुर्वेदिक उपाय अपनाने होते हैं जिससे शरीर को अतिरिक्त पोषक तत्व मिलते रहे और बॉडी डीटॉक्सिफाई होती रहे या विषैले तत्व शरीर से बाहर निकलते रहे.

    इसलिए इस लेख में जीरे के गुण, जीरा खाने के फायदे और नुकसान, जीरे के उपयोग और भुना जीरा खाने के फायदे के बारे में जाना.

    जीरा के फायदे बहुत हैं और नुकसान कम बस इसका सही मात्रा में सेवन करें और अपने आप को स्वस्थ रखें.

    धन्यवाद.

    प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

    प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?
    प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

    स्वस्थ रहने और फिट दिखने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है. कई विशेषज्ञों और अध्ययनों के अनुसार जो लोग प्रतिदिन व्यायाम करते हैं वह मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहते हैं तथा कई गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं.

    लेकिन आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में लोगों के पास इतना समय नहीं होता है कि वह अपनी फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दे पाए जिसकी वजह से पेट के निचले हिस्से पर चर्बी जमा होने लगती है जिसे बैली फैट (belly fat) कहते हैं.

    बैली फैट को कम करने और फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज करना कारगर साबित होती है.

    तो आइए जानते हैं प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करते हैं, प्लैंक एक्सरसाइज कितनी देर तक करना चाहिए, प्लैंक एक्सरसाइज करने के क्या फायदे होते हैं और कुछ टिप्स?


      प्लैंक एक्सरसाइज क्या है | what is plank exercise in hindi

      प्लैंक एक्सरसाइज एक तरह की इसोमेट्रिक कोर एक्सरसाइज होती है जो मांसपेशियों के कार्य करने की क्षमता और शरीर की ताकत को बढ़ाती है.

      पेट और कोर की मजबूती के लिए तथा शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज सबसे अच्छा व्यायाम होता है.

      प्लैंक एक्सरसाइज इतनी कारगार होती है कि बड़े-बड़े फुटबॉलर, मुक्केबाज, हॉकी प्लेयर और एथलीट्स भी इस एक्सरसाइज को अपने डेली रूटीन में जरूर करते हैं.

      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें | how to do plank exercise in hindi

      हर एक्सरसाइज करने का एक तरीका होता है यदि सही रूप से एक्सरसाइज को की जाए तो इसके अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं. तो आइए जानते हैं प्लैंक एक्सरसाइज कौन-कौन सी होती हैं और प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करते हैं?

      1. फ्रंट प्लैंक या सिंपल प्लैंक (front plank or simple plank)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ सबसे पहले प्लैंक पोजीशन में आ जाएं यानी कि हाथों की कोहनी सीधे आपके कंधों के नीचे होने चाहिए. 

        ▸ कंधे और हिप्स एक सीधी लाइन में होने चाहिए, आपकी कमर ना ही ज्यादा ऊपर और ना ही ज्यादा नीचे होनी चाहिए.

        ▸ अपने पैरों के पंजों के बीच में हिप्स के बराबर की चौड़ाई का गैप रखें.

        ▸ अब इस पोजीशन में आप 60 सेकेंड से 1 मिनट तक या अपनी क्षमता अनुसार रह सकते हैं.

      प्रभावी:

      सिंपल प्लैंक एक्सरसाइज को करने से हाथों के मसल्स, कंधे, कोर और कोहनी में मजबूती आती है. इस एक्सरसाइज को करने से पेट की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे बैली फैट तीव्रता से कम होता है.

      2. स्ट्रेट आर्म प्लैंक (straight arm plank)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ सबसे पहले पुश अप्स की अवस्था में आ जाएं.

        ▸ फिर अपने हाथों को कंधों के नीचे सीधा रखें.

        ▸ अपने सिर को पीठ के साथ एक सीधी रेखा में बनाते हुए पैरों को सीधा रखें.

        ▸ कम से कम 60 सेकंड से 1 मिनट तक इस एक्सरसाइज को करें.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज को करने से कंधों और कोर पर भार पड़ने से मजबूती आती है तथा शरीर का संतुलन बढ़ता है और कोर (पीठ और पेट की मांसपेशियां की) ताकत बढ़ती है.

      3. साइड प्लैंक (side plank)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ ऊपरी पैर को निचले पैर के ठीक ऊपर रखकर एक तरफ लेट जाएं.

        ▸ हिप्स को उठाएं ताकि पैर से लेकर गर्दन तक एक सीधी रेखा बन सके.

        ▸ अपने कूल्हों या कंधों को आगे या पीछे ना जाने दें.

        ▸ इस पोजीशन में अपनी क्षमता के अनुसार शरीर को पकड़े और 60 सेकंड से 1 मिनट तक इसी अवस्था में रहें.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज को करने से पेट के निचले हिस्से पर जो चर्बी चढ़ी होती है उसे कम करने में मदद मिलती है.

      4. वन आर्म प्लैंक (One arm plank)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ सबसे पहले स्ट्रेट आर्म प्लैंक पोजीशन में आ जाएं यानी कि पुशअप्स स्थिति में.

        ▸ अब इस पोजीशन में थोड़ी देर रुकने के बाद अपने एक हाथ को हवा में उठाएं और कुछ देर के लिए अपने शरीर को एक हाथ की स्थिति में रखें.

        ▸ फिर दूसरे हाथ से इसी प्रक्रिया को दोहराएं.

        ▸ इस एक्सरसाइज मे आप क्षमता अनुसार एक हाथ के साथ एक पैर को भी ऊपर हवा में उठा सकते हैं.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज को करने से शरीर का पूरा वजन एक हाथ पर आ जाता है जिससे पीठ, हाथ, कंधे और पेट की मांसपेशियों की मजबूती बढ़ती है.

      5. वन लेग प्लैंक (one leg plank)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ सबसे पहले प्लैंक पोजीशन में आ जाएं.

        ▸ अपने दाहिने पैर को ऊपर उठाएं तथा बाएं पैर को फर्श पर रखें और शरीर का संतुलन को बनाए रखें.

        ▸ दूसरे चरण में अपने बाएं पैर को ऊपर हवा में उठाएं तथा दाहिने पैर को फर्श पर रखें.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज से जब आप प्लैंक पोजीशन में होते हैं तो कोर पर कई गुना दबाव बढ़ जाता है जिससे कोर और कंधों की मजबूती मे अधिक वृद्धि होती है.

      6. प्लैंक जैक (plank jack)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ सबसे पहले स्ट्रैट प्लैंक पोजीशन में आ जाएं यानि की आपके हाथ सीधे कंधों के नीचे होने चाहिए.

        ▸ अब आपकी कमर एक सीधी अवस्था में होनी चाहिए ना ही ज्यादा ऊपर और ना ही ज्यादा नीचे.

        ▸ अब अपने दोनों पैरों को जंप के साथ इन और आउट करें.

        ▸ आप ऐसा 1 मिनट तक या अपनी क्षमता अनुसार कर सकते हैं.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज को करने से कंधों, हाथों और कोर की मजबूती बढ़ती है तथा पैरों की मांसपेशियों की मजबूती भी  बढ़ती है.

      7. स्विस बॉल पाइक (Swiss ball pike)


      प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करें और इसके फायदे | How to do plank exercise and its benefits in hindi?

      कैसे करें:

        ▸ बोल के ऊपर अपने पैरों के पंजों को रखकर स्ट्रैट प्लैंक अवस्था में आ जाएं.

        ▸ फिर गेंद को पैरों की उंगलियों से आगे करते हुए घुटनों को बंद रखें और हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं.

        ▸ फिर हिप्स को नीचे करते हुए धीरे-धीरे वापस उसी अवस्था में आ जाएं.

      प्रभावी:

      इस एक्सरसाइज को करने से हाथों और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं साथ में कोर मसल्स भी मजबूत होते हैं.

      प्लैंक एक्सरसाइज करने के फायदे | Benefits of plank exercise in hindi

      हर एक्सरसाइज को करने के अपने ही अलग-अलग फायदे होते हैं तो आइए जानते हैं प्लैंक एक्सरसाइज के फायदे.

      1. मांसपेशियों मजबूती होती है (muscles get stronger)

      प्लैंक एक्सरसाइज (plank exercise in Hindi) कई तरह की होती है जिसमे अलग-अलग वेरिएशन होते हैं प्लैंक एक्सरसाइज ना सिर्फ हिप्स, जांघ और कंधे पर कार्य करती है बल्कि यह पूरे शरीर के लिए प्रभावी होती है.

      प्लैंक एक्सरसाइज को करने से हाथ, कंधों, पैर और पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उनके कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है.

      2. बॉडी रहे एक्टिव (body be active)

      प्लैंक एक्सरसाइज करने से शरीर की मांसपेशियों का लचीलापन और मजबूती बढ़ती है, शरीर की अकड़न दूर होती है और मानसिक तथा शारीरिक क्षमता बढ़ती है जिस कारण बॉडी पूरे दिन एक्टिव रहती है.

      3. शरीर के पोस्चर में सुधार (improve body posture)

      प्लैंक एक्सरसाइज करने से शरीर के कंधे, सीना, कमर, गर्दन, पेट और हाथों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे शरीर के बैठने, उठने और खड़े होने की अवस्था मे सुधार आता है और शरीर का संतुलन भी अच्छा होता है.

      प्लैंक एक्सरसाइज को करने से कमर मजबूत होती है और कमर के निचले हिस्से के दर्द में भी आराम मिलता है.

      4. बैली फैट कम करने में प्लैंक एक्सरसाइज के फायदे (Reduce belly fat)

      जब शरीर के पेट पर अतिरिक्त चर्बी बढ़ जाती है और पेट बाहर की ओर निकल आता है तो इसे कम करने के लिए कई तरह के प्रयास करते हैं. बढ़ते हुए पेट या बैली फैट को कम करने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज बहुत ही कारगर साबित होती है.

      प्लैंक एक्सरसाइज को करने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, कैलोरी तेजी से बर्न होती हैं और मेटाबॉलिज्म का स्तर बढ़ता है जिस कारण पेट के आस पास की चर्बी तेजी से घटने लगती है.

      रोजाना 60 सेकंड से 1 मिनट तक प्लैंक एक्सरसाइज के 3 सेट 30 दिनों तक करने से अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं. बड़े-बड़े जिम ट्रेनर भी बेली फैट को कम करने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं.

      5. मूड अच्छा करने के लिए (improve mood)

      प्लैंक एक्सरसाइज करने से शरीर की शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार आता है और गतिविधि बढ़ती है जिसके कारण मस्तिष्क में एंडोर्फिन नामक हारमोंस उत्पन्न होता है जो मूड को बेहतर और फ्रेश बनाने में मदद करता है.

      प्लैंक एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है, शरीर के कार्य करने की गतिविधि बढ़ती है और तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है.

      6. शरीर का लचीलापन बढ़ाने में (increase body flexibility)

      प्लैंक एक्सरसाइज से पूरे शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है. लचीलापन बढ़ने से शरीर का संतुलन भी बना रहता है और चोट लगने की संभावना कम होती है.

      7. चोट लगने की संभावना कम होती है (less chance of injury)

      प्लैंक एक्सरसाइज करने से कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों में मजबूती आती है जिससे रोजाना की गतिविधियों को करने से मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है और कमर दर्द से भी छुटकारा मिलता है. 

      मांसपेशियों में लचीलापन और मजबूती बढ़ने से शरीर के किसी भी भाग में चोट लगने की संभावना कम होती है.


      8. बढ़ाये हड्डियों की मजबूती (Increase bone strength)

      प्लैंक एक्सरसाइज को करने से हाथों, कंधों, कमर और पैरों की हड्डियों में मजबूती आती है. पूरे शरीर में ब्लड सरकुलेशन सही रूप से होता है जिससे कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है.

      हड्डियों से जुड़ी हुई ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी में भी डॉक्टर प्लैंक एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं.

      प्लैंक एक्सरसाइज शेड्यूल | plank exercise 30 days schedule

      दिन (Days) समय (Time) दिन (Days) समय (Time)
      1 20 sec 2 20 sec
      3 30 sec 4 30 sec
      5 40 sec 6 REST
      7 45 sec 8 45 sec
      9 1 min 10 1 min
      11 1 min 12 1 min 30 sec
      13 REST 14 1 min 40 sec
      15 1 min 50 sec 16 2 min
      17 2 min 18 2 min 30 sec
      19 REST 20 2 min 30 sec
      21 2 min 30 sec 22 3 min
      22 3 min 23 3 min
      24 3 min 30 sec 25 3 min 30 sec
      26 REST 27 4 min
      28 4 min 29 4 min 30 sec
      30 5 min

      प्लैंक एक्सरसाइज कितनी देर तक करना चाहिए  | Time for plank exercise in hindi?

      यदि हम प्लैंक एक्सरसाइज की शुरुआत कर रहे हैं तो 20 सेकंड से लेकर 60 सेकंड तक 3 सेट्स के रूप में करना चाहिए.

      जब धीरे-धीरे शरीर की क्षमता बढ़ जाती है तो इसके समय को 1-5 मिनट बढ़ा सकते हैं. प्लैंक एक्सरसाइज के समय का शेड्यूल टेबल के द्वारा दिखाया गया है.

      प्लैंक एक्सरसाइज करते समय सावधानियां | Planck exercise Precautions in hindi

      किसी भी एक्सरसाइज को करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है जिससे शरीर को कोई नुकसान ना पहुंचे. तो आइए जानते हैं प्लैंक एक्सरसाइज करने की टिप्स.

      1. यदि आपके कंधे, घुटने, कमर या हाथों में किसी भी प्रकार की चोट है तो आप प्लैंक एक्सरसाइज ना करें.

      2. गर्भवती महिलाओं को प्लैंक एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए.

      3. यदि रीड की हड्डी में और गर्दन में किसी भी प्रकार का दर्द रहता है तो प्लैंक एक्सरसाइज ना करें.

      4. प्लैंक एक्सरसाइज करते समय बॉडी एक सीधी रेखा में होनी चाहिए.

      5. प्लैंक एक्सरसाइज करते समय यह सुनिश्चित करें, कि किसी भी प्रकार की प्लैंक एक्सरसाइज को आप सही अवस्था में कर रहे हैं तभी उसका पूर्ण रूप से फायदा मिलेगा.

      6. एक्सरसाइज करते समय यदि आपके शरीर में किसी भी तरह की समस्या हो रही है तो चिकित्सक से जरूर परामर्श करें.

      निष्कर्ष | Conclusion

      एक स्वस्थ लाइफस्टाइल जीने के लिए तथा हमेशा बॉडी को एक्टिव रखने के लिए एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है. इस भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग बैली फैट का शिकार होते जा रहे हैं. यदि आप बैली फैट को कम करना चाहते हैं तो प्लैंक बहुत ही कारगर एक्सरसाइज है.

      प्लैंक एक्सरसाइज ना केवल कोर मसल्स को मजबूत करती है बल्कि कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को भी कम करती है.

      इसलिए इस लेख के द्वारा जानने की कोशिश की है, कि प्लैंक एक्सरसाइज कौन-कौन सी होती हैं, प्लैंक एक्सरसाइज कैसे करते हैं? इसके फायदे, टिप्स तथा प्लैंक एक्सरसाइज करने का टाइम टेबल चार्ट.

      कई बड़े-बड़े जिम ट्रेनर, डॉक्टर, एथलीट्स और स्पोर्ट्स पर्सन भी इस एक्सरसाइज को करते हैं और करने की सलाह देते हैं.

      पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ

      Q. प्लैंक एक्सरसाइज कितनी देर तक करना चाहिए?

      A. शुरुआत में प्लैंक एक्सरसाइज 20-60 सेकंड तक करनी चाहिए. एक्सरसाइज करते-करते जब शरीर की क्षमता बढ़ जाती है तो प्लैंक 1-5 मिनट तक भी कर सकते हैं.

      Q. प्लैंक एक्सरसाइज करने के क्या फायदे होते हैं?

      A. प्लैंक एक्सरसाइज करने से शरीर को कई अचूक फायदे होते हैं जैसे कि शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने, बॉडी को एक्टिव रखने, शरीर का संतुलन और पोस्चर सुधारने में, बैली फैट को कम करने, तनाव मुक्त रहने और वजन कम करने में आदि.

      Q. प्लैंक एक्सरसाइज करने का तरीका क्या है?

      A. सबसे पहले प्लैंक अवस्था में आ जाएं और अपने हाथों की कोहनी को सीधे अपने कंधों के नीचे रखें तथा पीठ और हिप्स एक सीधी रेखा में होने चाहिए. फिर अपने शरीर को इसी अवस्था में 60 सेकंड तक बनाए रखें.

      Q. क्या प्लैंक एक्सरसाइज करने से बैली फैट कम होता है?

      A. जी हां, बैली फैट को कम करने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज बहुत ही कारगर साबित होती हैं. यदि आप प्रतिदिन प्लैंक एक्सरसाइज 30 दिन तक करते हैं तो इससे बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे.

      धन्यवाद..

      और भी पढ़ें...

      10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

      10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi
      10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

      शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम (Exercise) करना बेहद जरूरी है. संसार के समस्त सुखों में स्वास्थ्य को सबसे पहला सुख माना गया है. उपनिषद भी कहता है - पहला सुख निरोगी काया.

      मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए एक्सरसाइज को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेना चाहिए. एक्सरसाइज शरीर के लिए टॉनिक के समान काम करता है जिससे शरीर और मन स्वस्थ होते हैं तथा हम कई गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं.

      इसलिए इस लेख मे हम स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के महत्व को जानेंगे की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज क्या है, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने के फायदे, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कौन-कौन सी है और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कैसे करते हैं?


        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज क्या है | What is stretching exercise in hindi

        अधिकतर काम के दबाव के कारण लोगों की दिनचर्या इतनी व्यस्त रहती है कि उनके पास वर्कआउट या जिम जाने का समय नहीं रहता है. ऐसे में आप सुबह के समय थोड़ा सा वक्त निकाल कर घर पर ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं.

        किसी भी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी को करने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना जरूरी होता है क्योंकि स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से शरीर की मांसपेशियों में गर्माहट आ जाती है.

        आपने देखा होगा कि जब हम जिम में एक्सरसाइज करने के लिए जाते हैं तो कई जिम ट्रेनर वर्कआउट करने के बाद में स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने के लिए कहते हैं. जिससे मांसपेशियों को आराम मिले और हम चोटिल ना हो.

        इसके अलावा स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (stretching exercise in Hindi) करने से शरीर को कई फायदे होते हैं जैसे कि शरीर का लचीलापन (Flexibility) बना रहता है, मांसपेशियों की जकड़न (Tightness) कम होती है, शरीर के जोड़ों के मुड़ने की क्षमता बढ़ती है, मांसपेशियों की लंबाई और शरीर के पोस्चर में सुधार आता है.

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कैसे करें | How to do stretching exercises in hindi?

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज घर पर ही बड़ी आसानी से सुबह या शाम के वक्त कर सकते हैं. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन आता है जिससे हम तनाव मुक्त (stress free) रहते हैं.

        एक बेहतर दिनचर्या की शुरुआत के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बेहद फायदेमंद है. आइए जानते हैं स्ट्रेच एक्सरसाइज करने के तरीके?

        1. ओवरहेड स्ट्रेच (Overhead stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        ओवरहेड स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से कमर, पीठ, गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है जिस कारण मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है और रिलैक्स महसूस होता है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ ओवरहेड स्ट्रेच करने के लिए अपने पैरों को कंधों की चौड़ाई से अलग करके सीधे खड़े हो जाएं.

          ▪ बाहों को सीधे ऊपर की ओर ले जाएं और हथेलियों को ऊपर की ओर रखते हुए उंगलियों को आपस में मिला लें.

          ▪ कंधों को नीचे दबाते हुए बाहों को ऊपर उठाएं कुछ समय के लिए रुके फिर मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव को छोड़ दें.

          ▪ इसी तरह से यह विधि 3-4 बार दोहराएं.

        2. साइड स्ट्रेच (Side stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        साइड स्टेज एक्सरसाइज करने से पसलियों के बीच की इंटरलॉक मांसपेशियों को तनाव मुक्त करके फेफड़ों को प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता बढ़ती है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ साइड स्ट्रेच एक्सरसाइज करने के लिए पहले सीधे और दोनों पैरों को थोड़ा सा फैलाकर खड़े हो जाएं.

          ▪ अपने बाएं हाथ को कमर पर रखें तथा दाएं हाथ को सीधा लेकर बाएं तरफ झुके.

          ▪ दाएं हाथ को कमर पर रखें तथा बाएं हाथ को सीधा लेकर दाएं तरफ झुके.

          ▪ इसी तरह कम से कम 30-40 सेकंड करें और इस प्रक्रिया को 3-4 बार करें.

        3. बटरफ्लाई स्ट्रेच (butterfly stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        बटरफ्लाई स्ट्रेच सबसे आसान स्ट्रेच एक्सरसाइज में से एक है. इस एक्सरसाइज को करने से आंतरिक जांघों, कूल्हों और कमर पर असर पड़ता है. वर्कआउट करने के बाद शरीर को रिलैक्स करने के लिए यह एक अच्छा व्यायाम है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ बटरफ्लाई स्ट्रेच एक्सरसाइज करने के लिए अपनी पीठ सीधी और पैरों को अपने सामने की ओर रखकर बैठे.

          ▪ अब पैरों को अपने पास खींचे तथा अपने घुटनों को मोड़ लें, पैरों के तलवों को एक दूसरे से मिला लें.

          ▪ अपने हाथों को पैर के पंजों के ऊपर रखें इसके बाद अपने ऊपरी शरीर को आगे की ओर धीरे-धीरे ले जाएं.

          ▪ लगभग 30-40 सेकंड तक इस पोजीशन में रहे और इस विधि को 3-4 बार करें.

        4. नी टू चेस्ट (Knees to chest in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        अधिकतर बहुत से लोगों को कमर, कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से में कठोरता और दर्द का अनुभव होता है. इस स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से कमर के नीचे भाग की मांसपेशिया मजबूत होती है जिससे कमर और कूल्हों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ इस एक्सरसाइज के लिए जमीन पर सीधे लेट जाएं.

          ▪  कंधों को आराम से रखें जबकि एक घुटने को धीरे-धीरे ऊपर लाते हैं और दूसरे पैर को फर्श पर सीधा छोड़ दें.

          ▪ अपने घुटने को अपने हाथों से पकड़े और इसे अपने सीने की और 10 सेकेंड के लिए खींचे.

          ▪ अब अपने पैर को नीचे करें और विपरीत दिशा में इस व्यायाम को दोहराएं. इस प्रक्रिया को 2-4 बार करें.


        5. आर्म एंड शोल्डर स्ट्रेच (Arm and shoulder stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        हाथ और कंधे की स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से पीठ, कंधे और हाथ की मांसपेशियों की ताकत बढ़कर इनके कार्य करने की क्षमता बढ़ती है. इस एक्सरसाइज को करने से शरीर के पोस्चर और हड्डियों में सुधार आता है तथा चोट लगने का जोखिम भी कम होता है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ इस एक्सरसाइज करने के लिए पहले आप सीधे खड़े हो जाएं.

          ▪ फिर दाहिने हाथ को बाएं हाथ की तरफ ले जाएं और इसे अपने बाएं कंधे पर तिरछा रखें.

          ▪ बाएं हाथ से दाएं हाथ को अंदर की तरफ स्ट्रैच करें फिर बाएं हाथ के साथ उस पर दबाव बढ़ा कर अपने दाएं हाथ को अपने सीने के करीब खींचे.

          ▪ 10 सेकंड के लिए इस स्ट्रैच को बनाए रखें और फिर इसी प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराएं.

        6. चेस्ट स्ट्रेच (Chest stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        चेस्ट एक्सरसाइज करने के कई तरीके होते हैं. चेस्ट एक्सरसाइज करने से सीने की मांसपेशियों में खिंचाव आता है साथ ही हमारे कंधे और हाथों की मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है तथा फेफड़े और हृदय के कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ यह एक्सरसाइज करने के लिए अपने पैरों को थोड़ा सा फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं.

          ▪ अपनी पीठ को सीधा करें अपने हाथों की उंगलियों को अपने कूल्हे के पीछे ले जाकर उंगलियों को आपस में फंसा लें.

          ▪ धीरे-धीरे अपनी इंटरलॉक उंगलियों को ऊपर की ओर यानी छत की ओर धकेल जब आप अपनी बाहों को उठाते हैं तो सांस लें और सांस छोड़ें.

          ▪ जब आपकी बाहें चरम सीमा पर पहुंच जाएं यानी कि और ऊपर ना जा सके तो उस स्थिति में 15-30 सेकंड के लिए रुके रहे. इस स्थिति में अपने नाक और मुंह से गहरी सांस लेते रहे.

          ▪ अब आप अपनी प्रारंभिक स्थिति में लौट आए और गहरी सांस लें इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएं.

        7. ट्राइसेप्स स्ट्रेच (Triceps stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        ट्राइसेप्स एक्सरसाइज करने से हाथ, कंधे और गर्दन की मांसपेशियों की अकडन दूर होती है, मांसपेशियां लंबी होती है और शरीर तनाव मुक्त होता है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ अपने पैरों को कंधों की चौड़ाई से अलग करके सीधे खड़े हो जाएं.

          ▪ अपने दाएं हाथ को उठाकर ऊपरी पीठ के मध्य भाग तक ले जाएं.

          ▪ फिर बाएं हाथ से कोहनी को पकड़े और धीरे से खींचे.

          ▪ 10 से 12 सेकंड के लिए रुके फिर इसी तरह दूसरी तरफ दोहराएं.

        9. नैक स्ट्रेच (Neck stretch in hindi)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        नेक स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से गर्दन के आसपास की मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है, मांसपेशियों की गतिशीलता बढ़ती है और गर्दन के दर्द में भी आराम मिलता है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ पैरों को कूल्हों की चौड़ाई से अलग रखें और दोनों हाथों को नीचे की ओर रखें.

          ▪ सिर को दाई और झुकाए तथा दाहिने कान को दाहिने कंधे से छूने की कोशिश करें ऐसा करते हुए गर्दन और कंधे के बाएं और खिंचाव महसूस करें.

          ▪ सिर को बाएं और झुकाए बाएं कान को बाएं कंधे से छूने की कोशिश करें फिर गर्दन और कंधे के दाहिने हिस्से में खिंचाव महसूस करें.

          ▪ हर बार 10 सेकेंड के लिए इस स्थिति में रहें इस प्रक्रिया को 3 बार दोहराएं.

        फॉरवर्ड बैंड (stretch exercise for height)


        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi

        प्रभावी (effective) :

        इस एक्सरसाइज को करने से पिंडली की मांसपेशियों की ताकत और क्षमता में सुधार होता है तथा यह एक्सरसाइज रीड की हड्डी को फैलाता है जिससे हाइट बढ़ने में मदद मिलती है.

        कैसे करें (how to do) :

          ▪ सीधे खड़े होकर अपने हाथों को ऊपर की ओर उठाएं.

          ▪ अब धीरे-धीरे झुके और अपने पैरों को उंगलियों से छूने की कोशिश करें.

          ▪ झुकते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए.

          ▪ घुटनों को बिना झुकाए पैरों को छूना मुश्किल होता है लेकिन नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे यह हो सकता है.

          ▪ इसे नियमित रूप से दिन में 4-5 बार करने से लाभ होता है.

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने के फायदे | Benefits of stretching exercises in hindi

        शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए व्यायाम (Exercises) करना बेहद जरूरी है यदि दिन की शुरुआत व्यायाम के साथ करते हैं तो दिन भर ऊर्जावान, तनावमुक्त तथा मन प्रसन्न चित्त रहता है.

        आइए जानते हैं स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने के क्या फायदे होते हैं?

        1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से शरीर के जोड़ों के मुडने की और उनके कार्य करने की क्षमता में सुधार आता है. 

        2. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी बढ़ती है तथा हम दिन भर ऊर्जावान महसूस करते हैं. 

        3. वर्कआउट करने से पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से चोट लगने की संभावनाएं कम होती है.

        4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों का लचीलापन और मजबूती बढ़ती है जिससे मांसपेशियां प्रभावी रूप से सक्रिय होती हैं और इनके कार्य करने की क्षमता बढ़ती है.

        5. सुबह के समय एक्सरसाइज करने से दिन भर तनाव या सुस्ती महसूस नहीं होती है और अपनी पूरी दिनचर्या को प्रसन्न चित्त होकर खत्म कर सकते हैं.

        6. जब जिम में वर्कआउट करने जाते हैं तो जिम इंस्ट्रक्टर वर्कआउट करने के बाद स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने के लिए कहते हैं क्योंकि वर्कआउट से होने वाले दर्द को कम करने मे यह लाभदायक है.

        7. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज शरीर में कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद करते है जिससे हृदय रोग जैसी बीमारियों से बच सकते हैं.

        8. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है बल्कि मांसपेशियों के दर्द और अकड़न को कम करके मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

        9. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज मांसपेशियों के दर्द, पीठ के निचले हिस्से के दर्द और कमर दर्द को कम करने में मदद करती है.

        10 आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जो रखे आपको फिट | Stretching Exercises in hindi
        आइए जानते हैं स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने का समय और टिप्स.

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कब करना चाहिए | When to do stretching exercises in hindi?

        किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज को करने से पहले इसके समय के बारे में जान लेना चाहिए. तो आइए जानते हैं स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कब कर सकते हैं?

        वैसे तो स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने का कोई निश्चित समय नहीं है. आप जब चाहे अपने शरीर को स्ट्रेच कर सकते हैं बस इतना ध्यान देना चाहिए कि जब बॉडी को स्ट्रेच कर रहे हो तो हाथ पैरों को फैलाने के पर्याप्त जगह होनी चाहिए.

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज किसी भी समय की जा सकती है जैसे कि

          ▪ सुबह सोकर उठने के बाद.

          ▪ सोने से पहले.

          ▪ दिन में किसी भी समय.

          ▪ ऑफिस में ब्रेक के दौरान.

          ▪ शरीर के सुस्त पड़ने के दौरान.

          ▪ एक्सरसाइज करने के बाद.

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने की टिप्स | stretching exercises tips in hindi

        स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है अन्यथा इससे शरीर को नुकसान पहुंच सकता है तो आइए जानते हैं स्ट्रैचिंग करते समय बरतने वाली सावधानियां.

        1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज एक तरह का वार्मअप नहीं है. इसलिए वर्कआउट के पहले स्ट्रेचिंग करने से शरीर की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है.

        2. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज शरीर की क्षमता अनुसार ही करना चाहिए अन्यथा शरीर की मांसपेशियों में अधिक खिचाव उत्पन्न हो सकता है.

        3. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बहुत ही धीरे-धीरे और शांत तरीके से करनी चाहिए यदि आप झटके के साथ या बहुत जल्दी-जल्दी एक्सरसाइज करते हैं तो इससे मांसपेशी में चोट लगने की संभावना बढ़ सकती है.

        4. स्ट्रेचिंग इस तरह करना चाहिए की मांसपेशियों में हल्का सा खिचाव महसूस हो यदि आपको अधिक दर्द महसूस होता है तो इस तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज ना करें.

        5. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज 20-30 सेकंड तक की करें.

        6. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करते समय नाक और मुंह से सांस ले और सांस छोड़ते रहे.

        7. स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से पहले 5-10 मिनट के लिए हल्की वॉकिंग, जोगिंग और साइकिलिंग करनी चाहिए जिससे शरीर की मांसपेशियों में गर्माहट आ जाए.

        8. हर व्यक्ति के अनुवांशिक गुण और शरीर की मांसपेशियों का लचीलापन अलग होता है इसलिए हमेशा शरीर की क्षमता के अनुसार ही स्ट्रेचिंग करें.

        9. स्ट्रेचिंग करते समय गर्दन, कमर के निचले हिस्से, कंधों और जोड़ो जैसी प्रमुख मांसपेशियों का ध्यान रखते हुए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए जिससे शरीर को पूरी तरह फायदा मिले.

        10. सप्ताह में कम से कम 2 या 3 दिन बार नियमित रूप से स्ट्रेच एक्सरसाइज करने से लाभ मिलता है.

        11. जो व्यक्ति स्पोर्ट्स खेलते हैं उन्हें उसी तरह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए जैसे फुटबॉल प्लेयर को हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच करना चाहिए.

        आखिरी शब्द | last word

        यदि जीवन को स्वस्थ और रोग मुक्त रखना है तो एक्सरसाइज को जीवन का हिस्सा बना लीजिए. कई विशेषज्ञों के अनुसार एक्सरसाइज करने से शरीर की मानसिक और शारीरिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ बीमारियों का भी जोखिम कम होता है.

        इस लेख के द्वारा जाना कि स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज क्या है, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कैसे करें या तरीके, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के फायदे, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कब करना चाहिए और जरूरी टिप्स आदि?

        शरीर की मांसपेशियों की अकड़न दूर करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बेहद लाभदायक होती है.

        पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ

        Q. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कौन-कौन सी होती है?

        A. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कई तरह की होती है जैसे कि साइड स्ट्रेच, ओवरहेड स्ट्रेच, नेक स्ट्रेच, आर्म एंड सोल्डर स्ट्रेच, चेस्ट स्ट्रेच और बटरफ्लाई स्ट्रेच इत्यादि.

        Q. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से क्या फायदा होता है?

        A. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से शरीर की मांसपेशियों में लचीलापन और इनके कार्य करने की क्षमता बढ़ती है. एक्सरसाइज करते समय मांसपेशियों में हल्का सा खिंचाव महसूस होता है जिससे शरीर और मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है तथा वर्कआउट करने के दौरान चोट लगने की संभावना भी कम होती है.

        Q. हाइट बढ़ाने के लिए कौन सी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए?

        A. हाइट बढ़ाने के लिए फॉरवर्ड बैंड स्ट्रेच एक्सरसाइज सबसे आसान एक्सरसाइज है जिसे करने से हाइट बढ़ने में मदद मिलती है.

        ▪ सीधे खड़े होकर अपने हाथों को ऊपर की ओर उठाएं.
        ▪ अब धीरे-धीरे झुके और अपने पैरों को उंगलियों से छूने की कोशिश करें.
        ▪ झुकते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए.
        ▪ घुटनों को बिना झुकाए पैरों को छूना मुश्किल होता है लेकिन नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे यह हो सकता है.
        ▪ इसे नियमित रूप से दिन में 4-5 बार करने से लाभ होता है.

        Q. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज किस समय करना चाहिए?

        A. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने का कोई निश्चित समय नहीं है इसे आप सुबह उठने के बाद, सोने से पहले, ऑफिस में काम करने के दौरान और वर्कआउट करने के बाद कर सकते हैं.

        धन्यवाद.

        कमर दर्द के कारण और उपाय | Causes and remedies for back pain in hindi

        कमर दर्द के कारण और उपाय | Causes and remedies for back pain in hindi
        कमर दर्द के कारण और उपाय | Causes and remedies for back pain in hindi
        कैल्शियम, ऑस्टियोपोरोसिस की शिकायत, विटामिंस की कमी, रीढ़ की हड्डी की बनावट में खराबी और हड्डियों में कमजोरी आने की वजह से कमर दर्द की शिकायत हो सकती है.

        कई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 80% लोग जीवन में कभी ना कभी कमर दर्द (Back pain) का अनुभव जरुर करते हैं. अधिकतर कमर दर्द की समस्या 35-40 की उम्र के बीच होना शुरू हो जाती है.

        लेकिन बिगड़ती जीवन शैली और काम के दबाव के कारण कमर दर्द या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने की समस्या किसी भी उम्र के लोगों में देखी गई है. अक्सर महिलाएं मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान कमर दर्द की समस्या से अधिक जूझती हैं.

        इसलिए इस लेख में बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कमर दर्द (Back pain) क्यों होता है, कमर दर्द होने के कारण, कमर दर्द के लक्षण और कमर दर्द ठीक करने के क्या उपाय हो सकते हैं?


          कमर दर्द क्यों होता है | Why does back ache in hindi?

          बिजी लाइफ शेड्यूल होने से लोगों को यह लगता है कि वह अपने अनेक कामों को जल्द खत्म करें और फिर दूसरे काम में व्यस्त हो जाएं. इस तरह की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने शरीर को उतना आराम नहीं दे पाते हैं जितना शरीर को चाहिए जिस कारण धीरे-धीरे कई समस्याएं उत्पन्न होने लगती है.

          ऑफिस या अपने कार्यस्थल पर घंटों तक एक जगह बैठे रहना, गलत तरीके से भारी वजन को उठा लेना, लगातार काम में व्यस्त रहना, जरूरत से ज्यादा काम करना ऐसी स्थितियों में कमर या रीढ़ की हड्ड़ी के निचले हिस्से को सहारा देने वाली मांसपेशियां पर बार-बार दबाव पड़ता है.

          इस दबाव के कारण मांसपेशियों में खिंचाव और ऐठन होने लगती है जो कमर दर्द के सामान्य कारणों में शामिल हैं.

          शरीर में मेटाबोलिक रसायनों की कमी, कैल्शियम, ऑस्टियोपोरोसिस की शिकायत, विटामिंस की कमी, मासिक धर्म में अनियमितता होना, रीढ़ की बनावट में खराबी और हड्डियों में कमजोरी आने की वजह से कमर दर्द या पीठ दर्द की शिकायत हो सकती है.

          कमर दर्द होने के कारण | Due to back pain in hindi

          पीठ में दर्द होने का कारण स्वास्थ संबंधी समस्या या मानसिक और शारीरिक काम करने की प्रतिक्रिया हो सकती हैं. आइए जानते हैं कमर दर्द करने के कारण.

          1. तनाव (Tension)

          कमर दर्द (पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना) सीधे हमारे शारीरिक और मानसिक तनाव से जुड़ा होता है क्योंकि तनाव और दर्द अक्सर आपस में जुड़े होने से दोनों का एक दूसरे पर असर पड़ सकता है.

          आपने देखा होगा कि जो लोग तनावग्रस्त होते हैं वह अक्सर अपने गले, कंधे, पीठ, मस्तिष्क में दर्द को महसूस करते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तनाव होने से मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है.

          2. सोने की स्थिति (Sleeping position)

          कमर दर्द का कारण आपके सोने की स्थिति हो सकती है, आप किस प्रकार के गद्दे पर सोते हैं यह भी बेहद जरूरी है. मोटे या नरम स्पंज वाले गद्दे पर सोने से कुछ समय पश्चात यह पीठ दर्द का कारण बन सकता है. इसलिए कोशिश करें कि सोने के लिए कठोर गद्दे का इस्तेमाल करें.

          3. मांसपेशियों में खिंचाव (hamstring strain)

          एक जगह लगातार बैठे रहना, अधिक वजन उठाना, बहुत भारी वजन का काम करना, बैठने की मुद्रा सही ना होना इन सब कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है जिस कारण कुछ समय पश्चात पीठ दर्द की समस्या होने लगती है.

          क्योंकि शरीर के सभी अंग और मांसपेशियां एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं जो आपस में तालमेल के साथ काम करते हैं.

          4. ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी (Osteoporosis disease)

          बढ़ती उम्र के साथ-साथ हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं जब यह कमजोरी जरूरत से ज्यादा हो जाती है तो हड्डियों के टूटने की नौबत भी आ जाती है ऐसी स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कहां जाता है.

          ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी कमर दर्द, पीठ दर्द या रीढ़ के निचले हिस्से के दर्द का कारण बन सकती है.

          5. कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency)

          शरीर में हड्डियों के निर्माण और उनके विकास के लिए कैल्शियम तत्व का पोषण बेहद जरूरी है जब शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है तो हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं जिससे हड्डियों में दर्द, पीठ दर्द, यह कमर दर्द ऐसी समस्याएं होने लगती हैं.

          इसलिए हड्डियों की मजबूती या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी और सभी जरूरी पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिए.

          6. अधिक वजन होना (Being overweight)

          आज के समय में पीठ या कमर में दर्द होने की समस्या आम बात हो गई है. पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने की समस्या से काफी लोग ग्रसित होते हैं और यह संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. कमर दर्द होने का कारण आपका अधिक वजन भी हो सकता है.

          जब वजन बढ़ने लगता है तो पेट और कमर के नजदीक का हिस्सा फैलने लगता है जिससे रीड की हड्डी पीछे की तरफ झुकने लगती है और मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है जिसके परिणामस्वरूप पीठ के निचले हिस्से में दर्द उत्पन्न हो जाता है.

          7. गलत जीवन शैली (Wrong lifestyle)

          गलत जीवनशैली जीना कई रोगो को आमंत्रित देना है, एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए सही जीवन शैली का होना बहुत जरूरी है.

          लेकिन आज के समय में समय की कमी के अभाव से और बढ़ते हुए काम के दबाव से हम अपने शरीर को उतना आराम नहीं दे पाते हैं जितना कि शरीर को चाहिए जो आगे चलकर कमर में दर्द होने का कारण बन सकता है. 

          इसके अलावा झटके के साथ भारी वजन उठाना, बैठना, झुकना और मुड़ना यह सब भी आपके रोजमर्रा की जिंदगी पर निर्भर करता है क्योंकि इन प्रतिक्रियाओं में लापरवाही पीठ दर्द का कारण बन सकता है.

          8. व्यायाम न करना (Not exercising)

          व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने के लिए एक टॉनिक के रूप में काम करता है. व्यायाम करने से शरीर की सक्रियता, गतिशीलता, लचीलापन और इम्यूनिटी पावर बढ़ने से शरीर बिल्कुल फिट रहता है. प्रतिदिन कम से कम 25 से 30 मिनट व्यायाम जरूर करना चाहिए.

          व्यायाम करने से हड्डियों व मांसपेशियों की कसरत होती रहती है जिससे कमर दर्द (back pain) या किसी भी प्रकार के दर्द होने की संभावना बहुत कम होती है.

          कमर दर्द के लक्षण | Symptoms of back pain in hindi

          आइए जानते हैं पीठ दर्द होने के क्या लक्षण हो सकते हैं?

            ▪ जब कमर में दर्द रहता है तो व्यक्ति को झुकने, मुड़ने, बैठने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

            ▪ कमर दर्द होने से शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है.

            ▪ पीठ पर सूजन और हर वक्त गर्दन और कमर में दर्द रहना.

            ▪ पीठ दर्द के लक्षणों में दर्द गर्दन से लेकर नितंब तक हो सकता है.

            ▪ मांसपेशियों में खिंचाव होना.

            ▪ पीठ दर्द होने पर दर्द कमर से लेकर पैरों तक पहुंचना.

          कमर दर्द के उपाय | Remedy for back pain in hindi

          कुछ आसान से उपायों को अपनाकर पीठ दर्द को कम किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कमर दर्द (पीठ के निचले हिस्से के दर्द) से कैसे बचें?

          1. शारीरिक मुद्रा (Body posture)


          कमर दर्द के कारण और उपाय | Causes and remedies for back pain in hindi
          काम करते वक्त बैठने का सही तरीका.

          कमर दर्द के उपचार में शरीर की शारीरिक मुद्रा का सही होना जरूरी है. कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें ध्यान रखना पड़ता है अन्यथा यह पीठ दर्द का कारण बन सकती है.

            ▪ कभी भी भारी वजन उठाने से पहले अपने शरीर को टाइट कर लें एकदम लचक के साथ किसी भी भारी चीज को ना उठाएं.

            ▪ बैठने, मुड़ने और झुकने की स्थिति को सही रखें बैठते समय अपनी पीठ को सीधा रखें जिससे कि शरीर का वजन आपकी गर्दन या पीठ पर ना पड़े.

            ▪ काम करते वक्त बीच-बीच में स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के द्वारा शरीर को रिफ्रेश करते रहे.

          2. सुबह की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Morning stretching exercise)

          जब सुबह सोकर उठते हैं तो हमारी बॉडी एक विराम अवस्था में होती हैं क्योंकि हम पिछले 7 - 8 घंटे से सो रहे होते हैं. इसलिए शरीर की सक्रियता, मूवमेंट और लचीलापन बढ़ाने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जरूरी होती है.

          सुबह के समय स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से कई फायदे होते हैं जैसे कि शरीर की मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ता है, रक्त का प्रभाव सुचारू रूप से होता है, मांसपेशियों की लंबाई बढ़ती है जिससे शरीर के पोस्चर में सुधार आता है, शरीर के सभी मसल्स और जोड़ों में आराम मिलता है जिससे कमर दर्द को कम करने मे राहत मिलती है.

          3. पैदल चलना (to walk)

          कई विशेषज्ञों का मानना है कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द को कम करने के लिए पैदल चलना एक कारगर उपाय है.

          पैदल चलने से आपके पैर और कमर की मांसपेशियों में लचीलापन और मजबूती आती है और साथ में मेटाबॉलिज्म का स्तर बढ़ता है जिससे धीरे-धीरे वजन भी कम होता है. अधिक वजन भी कमर दर्द का एक कारण होता है.

          4. बीच-बीच में ब्रेक लें (Take a break in between)

          लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, घंटो तक ऑफिस या घर पर लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने काम करना और प्रतिदिन बस, ट्रेन से लंबे-लंबे सफर तय करना कमर (पीठ के निचले हिस्से में दर्द) का कारण बन सकते हैं.

          इसलिए यदि आप एक ही जगह पर कई घंटों तक बैठते हैं तो बीच- बीच में थोड़ा ब्रेक ले, इधर उधर थोड़ा सा वॉक करें जिससे आपकी रीड की हड्डी या बैक पर अधिक लोड ना पड़े.

          5. धूम्रपान से बचें (Avoid smoking)

          कई अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें कमर में दर्द की समस्या का खतरा बढ़ जाता है. धूम्रपान करना सेहत के लिए भी हानिकारक होता है क्योंकि इससे कैंसर, हर्दय रोग और फेफड़ो के रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. इसलिए पीठ दर्द से बचने के लिए धूम्रपान का सेवन बिल्कुल ना करें.

          कमर दर्द के कारण और उपाय | Causes and remedies for back pain in hindi

          6. नियमित व्यायाम करें (Do regular exercise)

          शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए हमें सप्ताह में कम से कम चार या पांच दिन व्यायाम जरूर करना चाहिए. व्यायाम करने से शरीर की हड्डियों में मजबूती और मांसपेशियों में लचीलापन एवं मजबूती आती हैं.

          जब शरीर स्वस्थ और फिट रहेगा तो किसी भी प्रकार का बैक पेन होने की संभावना कम होती है तथा हम तनाव से भी दूर रहते हैं जो पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने का कारण बन सकता है.

          7. कमर दर्द के लिए योगासन (Do regular yoga)

          शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए योग करना एक बहुत अच्छा विकल्प है. योग करने से हम किसी भी प्रकार की शारीरिक व मानसिक बीमारी से बच सकते हैं.

          व्यस्त दिनचर्या की वजह से कमर के दर्द की समस्या को भी योग के द्वारा कम करने में मदद मिलती है. योग करने से मांसपेशियों में लचीलापन और मजबूती आती है जिससे पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम किया जा सकता है.

          कमर दर्द के लिए निम्न योगासन कर सकते हैं जैसे कि 

          1. शलभासन
          2. मकरासन
          3. धनुरासन
          4. मर्कटासन
          5. उष्ट्रासन
          6. पवनमुक्तासन
          7. धनुरासन

          8. संतुलित भोजन का सेवन (Balanced food intake)

          शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार का सेवन बेहद जरूरी है. संतुलित भोजन करने से शरीर को हर प्रकार के पोषक तत्व की प्राप्ति होती रहती है जिस कारण हम कई रोगो से सुरक्षित रहते हैं.

          हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए विटामिन डी और कैल्शियम खाद पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे हड्डियों में होने होने वाला दर्द और कमर दर्द से भी बचा जा सकता है.

          अंतिम शब्द | Last word

          कमर दर्द की समस्या अक्सर 35-40 की उम्र के बाद देखने को मिलती है लेकिन गलत लाइफ़स्टाइल, तनाव और व्यस्त जीवन की वजह से व्यक्ति अपने शरीर को पूर्ण रूप से आराम नहीं दे पाते हैं जिसकी वजह से कमर दर्द (पीठ के निचले हिस्से में दर्द) की समस्या किसी भी उम्र के लोगों में हो रही है.

          इसलिए इस लेख के द्वारा जाना कि कमर दर्द क्यों होता है, कमर दर्द के कारण, लक्षण और कमर दर्द ठीक करने के उपाय.

          कमर दर्द से बचाव के लिए लगातार एक जगह ना बैठे, बीच में थोड़ा सा ब्रेक ले, मूवमेंट करते रहें, नित्य व्यायाम करें और एक अच्छी जीवनशैली जिये.

          पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ

          Q. कमर दर्द क्यों होता है?

          A. अक्सर आज के समय में बहुत से लोगों में कमर दर्द की समस्या हो रही है जिसका कारण गलत जीवनशैली और तनाव का दबाब हो सकता है. लगातार कार्यस्थल पर बैठे रहना, गलत तरीके से काम करना, तनाव महसूस करना, कमर के निचले हिस्से की हड्डियों या मांसपेशियों पर दबाव, ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी, कैल्शियम की कमी और विटामिन डी की कमी आदि कमर दर्द के कारण हो सकते हैं.

          Q. कमर दर्द के क्या लक्षण होते हैं?

          A. कमर दर्द होने पर कई तरह के लक्षण महसूस होते हैं जैसे कि झुकने, मुड़ने बैठने में परेशानी का सामना करना, शरीर का तापमान बढ़ना, कमर पर सूजन, गर्दन में दर्द रहना और मांसपेशियों में खिंचाव होना आदि.

          Q. कमर दर्द ठीक करने के क्या उपाय हैं?

          A. कमर दर्द सही करने के लिए हमें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे कि शारीरिक मुद्रा, व्यायाम करना, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना, पैदल चलना, धूम्रपान ना करना, काम करते बीच-बीच में टहलना या ब्रेक लेना और योगासन करना आदि.

          Q. कमर दर्द में कौन-कौन से योग करना फायदेमंद होते हैं?

          A. पीठ दर्द में कई तरह के योगासन कर सकते हैं जैसे कि शलभासन, मकरासन, धनुरासन, मर्कटासन, उष्ट्रासन, पवनमुक्तासन और धनुरासन आदि.

          धन्यवाद...

          आइए और पढ़ते हैं..